चमोली: बदरीनाथ के ब्रह्मकपाल में पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए उमड़े देश-विदेश के श्रद्धालु–

by | Sep 18, 2024 | चमोली, संस्कृति | 0 comments

कई तीर्थयात्री चटवापीपल और नंदप्रयाग में जाम में फंसने के कारण समय पर तर्पण के लिए नहीं पहुंच पाए, छलके तीर्थयात्रियों के आंसू–

बदरीनाथ: पितरों के उद्धार के लिए बदरीनाथ के ब्रहमकपाल में हर वर्ष लाखों तीर्थयात्री तर्पण और पिंडदान के लिए पहुंचते हैं। मंगलवार से पितर पक्ष शुरू हो गया है। जिसे देखते हुए हजारों तीर्थयात्री बदरीनाथ धाम पहुंचने लगे हैं। पहले दिन लगभग 3000 तीर्थयात्रियों ने ब्रह्मकपाल में अपने पितरों के लिए तर्पण व पिंडदान कराया। बदरीनाथ हाईवे पर जाम होने के चलते काफी संख्या में श्रद्धालु समय पर धाम नहीं पहुंच पाए। इससे तर्पण करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही।

बदरीनाथ धाम स्थित ब्रह्मकपाल में पिंडदान का बहुत अधिक महत्व है। जिसके चलते यहां पर पूरे साल लोग पितरों के लिए तर्पण व पिंडदान करने आते हैं। लेकिन श्राद्ध पक्ष में यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहंंचते हैं। मंगलवार को धाम में दो हजार श्रद्धालु ही पिंडदान व तर्पण कराने के लिए पहुंच पाए।

ब्रह्मकपाल में पिंडदान करते तीर्थयात्री-

बदरीनाथ हाईवे पर जगह-जगह मलबा आने से लग रहे जाम के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु समय पर बदरीनाथ नहीं पहुंच पाए हैं। मंगलवार को पिंडदान व तर्पण करने वालों में बड़ी संख्या स्थानीय लोगों की रही है। जबकि कुछ नेपाल, दक्षिण भारत सहित अन्य जगह से आए हैं।

श्रीनगर से आए भैरव दत्त डंगवाल ने बताया कि वे सोमवार को बदरीनाथ आ रहे थे, लेकिन गौचर में दिनभर जाम में फंसे रहे, जिसके चलते रात पीपलकोटी में रुकना पड़ा, मंगलवार सुबह 11 बजे यहां पहुंच पाए। दिल्ली से आए अनिल नेगी ने बताया कि वे पहले ही धाम में पहुंच गए थे।

पितरों के नाम यहां तर्पण व पिंडदान कराया। ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत समिति के केंद्रीय अध्यक्ष उमेश सती ने बताया कि पहले दिन करीब दो हजार श्रद्धालुओं ने तर्पण व पिंडदान कराया है। हाईवे की स्थिति ठीक होने पर श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाएगी। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने के कारण कई तीर्थयात्री समय पर बदरीनाथ नहीं पहुंच पाए। गुजरात के तीर्थयात्रियों की जाम में फंसने के कारण समय पर बदरीनाथ नहीं पहुंच सके। हमारे संवाददाता ने उनसे बातचीत करनी चाही, तो वे जाम में फंसे होने के कारण समय पर बदरीनाथ नहीं पहुंचे तो रोने लगे।

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