उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने की अध्यक्षता, निर्णय लिया कि मुख्य विकास अधिकारी और एसडीएम स्तर पर होगी जांच–
देहरादून, 04 जनवरी 2026: परिवार रजिस्टर में सामने आ रही गंभीर अनियमितताओं पर सरकार ने सख्ती दिखाई है। सरकार ने निर्णय लिया है कि मुख्य विकास अधिकारी और उपजिलाधिकारी स्तर पर प्रदेशभर में परिवार रजिस्टरों की जांच कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई। मुख्यमंत्री ने राज्यस्तर पर व्यापक, निष्पक्ष व समयबद्ध जांंच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रदेश के सभी जिलों में उपलब्ध परिवार, कुटुंब रजिस्टरों की प्रतियां तत्काल संबंधितजिलाधिकारी के पास सुरक्षित रखी जाएं, जिससे अभिलेखों में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना समाप्त हो।
बैठक में निर्णय लिया गया कि जांच वर्ष 2003 सेे अब तक की जाएगी। इससे पूर्व के वर्षाें में हुई संभावित अनियमितताओं की भी पहचान हो सके। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नाम दर्ज कराने वालों के खिलाफकड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवार रजिस्टर का पंजीकरण व प्रतिलिप सेवाएं पंचायत राज नियमावली, 1970 के तहत संचालित होती हैं। नियमों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाले प्रत्येक परिवार का नाम परिवार, कुटुंब रजिस्टर में दर्ज होना अनिवार्य है। वर्तमान प्रविष्टियाें के शुद्धिकरण व नए नामों को जोड़ने की प्रक्रिया का प्रावधान भी नियमावली में निहित है, जिसे अब और अधिक सख्त व पारदर्शी बनाए जाने की तैयारी है।
स्पष्ट किया गया है कि परिवार रजिस्टर में नाम दर्ज करने का अधिकार सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्राप्त है। जबकि अपील का अधिकार एसडीएम के पास निहित है। वर्तमान में परिवार रजिस्टर से संबंधित सेवाएं अपणि सरकार पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध कराई जा रही है।
बैठक में सचिव गृह शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, डीजीपी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार, विशेष सचिव पंचायतीराज डॉ. पराग धकाते, निदेशक पंचायतीराज निधि यादव आदि मौजूद रहे।


