चमोली: मां नंदा ने जताई इच्छा, बड़ी जात का आयोजन इसी साल होगा–

by | Jan 23, 2026 | आस्था, चमोली | 0 comments

सिद्धपीठ कुरुड़ में मां नंदा देवी ने अपने पश्वा पर अवतरित होकर जताई कैलाश जाने की इच्छा, 5 सितंबर से शुरू होगी बड़ी जात–

नंदानगर, 23 जनवरी 2026: मां नंदा की इस वर्ष बड़ी जात आयोजित होगी। जात समिति ने इसकी व्यापक तैयारियां भी शुरू कर ली हैं। मां नंदा की बड़ी जात के लिए डोलियों के प्रस्थान का रुट चार्ट भी घो​षित कर दिया गया है। पांच सितंबर को नंदा अपने सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर से कैलाश के लिए विदा होगी। मां नंदा ने अपने मुख्य पश्वा पर अवतरित होकर इसी वर्ष कैलाश जाने की इच्छा जताई। इसके बाद गौड़ ब्राह्मणों ने बड़ी जात आयोजन का दिनपट्टा तय किया। इसी के साथ मां नंदा की बड़ी जात की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। बड़ी जात यात्रा समिति ने बाकायदा मां नंदा की बड़ी जात का 21 दिन का यात्रा कार्यक्रम भी घोषित कर दिया है। बड़ी जात को लेकर भक्तगणों में उत्साह बना हुआ है।

वसंत पंचमी पर्व पर आज शुक्रवार को मां नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर परिसर में नंदा की बड़ी जात का दिनपट्टा कार्यक्रम प्रस्तावित किया गया था। मां नंदा के मंदिर में सुबह आठ बजे विशेष पूजाएं आयोजित हुई। करीब तीन घंटे तक मंदिर में पूजाएं हुई। इसके बाद अपराह्न 1 बजकर 20 मिनट पर सुंग गांव के रमेश सिंह बिष्ट पुत्र भोपाल सिंह चौसिंग्या खाडू को लेकर मंदिर प्रांगण में पहुंचे। जिसके बाद मां नंदा मंदिर के पुजारी व मुख्य अवतारी पुरुष मुंशीचंद गौड़ पर मां नंदा और कुंडबगड़ गांव के हिम्मत सिंह महर पर भूमियाल देवता अवतरित हुए। माता ने इसी साल कैलाश जाने की इच्छा जताई।

इसके बाद अपराह्न 1 बजकर 40 मिनट पर कुरुड मंदिर समिति बधाण डोली के अध्यक्ष नरेश गौड़, बंड डोली के अध्यक्ष अशोक गौड़, नंदा देवी बड़ी जात आयोजन समिति के अध्यक्ष कर्नल (सेनि) हरेंद्र सिंह रावत और कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला के साथ ही गौड़ ब्राह्मण, 14 सयानों और बधाण, दशोली व बंड क्षेत्र के हकहकूकधारी गांवों के जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में दिनपट्टा कार्यक्रम में बड़ी जात आयोजन की तिथि घोषित कर दी।

जिसके अनुसार 20 सितंबर 2026 को होमकुंड में नंदा की बड़ी जात आयोजित होगी। 5 सितंबर से बड़ी जात कुरुड़ मंदिर से दशोली, बधाण और बंड क्षेत्र की मां नंदा की डोलियां कैलाश के लिए प्रस्थान करेगी। बड़ी जात की तिथि तय हाेने के उपरांत विभिन्न गांवों से पहुंची महिला मंगल दल की महिलाओं ने मांगल गीत गाए। लोक गायक दर्शन फरस्वाण ने मां नंदा के साथ ही विभिन्न धार्मिक गीतों की शानदार प्रस्तुतियां दी।

दिनपट्टा कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, ब्लाॅक प्रमुख नंदानगर हीमा देवी, भाजपा मंडल अध्यक्ष कृपाल सिंह बिष्ट, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष विरेंद्र सिंह रावत, कांग्रेस प्रवक्ता तेजवीर कंडेरी, व्यापार संघ अध्यक्ष नंदानगर नंदन सिंह रावत के साथ ही सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। मां नंदा की जात की घोषणा होने के बाद बंड, दशोली और बधाण की मां राजराजेश्वरी की डोलियों के रुट भी घो​षित कर दिए गए। बड़ी जात समिति के अनुसार,

पांच सितंबर को डोली कुरुड़ मंदिर से कैलाश के लिए प्रस्थान करेगी। डोली का प्रथम रात्रि विश्राम चरबंग गांव में होगा। दूसरे दिन डोली कुंडबगड़, मथकोट, धरगांव, उस्तोली, सरपाणी, लांखी, भेंटी, स्यांरी, बंगाली, डुंग्री, केरा मेना, सूना, थराली, राड़ीबगड़, चेपड़ों, कोठी गांव से 12 सितंबर को डोली रात्रि प्रवास के लिए नंदकेशरी पहुंचेगी। यहां गढ़वाल और कुमाऊं की राज छंतोलियों का मिलन होगा। जिसके बाद 13 को डोली पूर्णा, देवाल, इच्छोली, हाट, फल्त्यागांव, कांडई, लब्बू, ल्वाणी, बगड़ीगाड़, मुंदोली, लोहाजंग से होते हुए कार्तिकबगड़ देवी लाटू मिलन के बाद 15 को रात्रि प्रवास के लिए वाण गांव पहुंचेगी।

16 को रणकधार, गैरोलीपातल, डोलीधार, वेदनी, पातर नचौणिया, केलवा विनायक, रुपकुंड, ज्योंरागली और 20 को डोली शिला समुद्र और पंचगंगा होते हुए होमकुंड पहुंचेगी। यहां पूजा अर्चना, हवन व प्रसाद वितरण के बाद डोली रात्रि प्रवास के लिए जामुन डाली पहुंचेगी। 21 को तातड़ा ध्योसिंह धाम से होते हुए डोली सुतोल, कनोल, वाण, रणकधार, कुलिंग, बगड़ीगाड, ल्वाणी, बमणबेरा, उलंग्रा, हाट अटठू, बेराधार, सुराईथाल, टुनरी, गोठिंडा, कुनीपार्था, कुराड़, सगवाड़ा व डांखोली गांव होते हुए 26 सितंबर को राजराजेश्वरी की डोली भेटा गांव पहुंचेगी। यहां माता की डोली छह माह तक स्थापित हो जाएगी।

5 सितंबर को दशोली की मां नंदा देवी की डोली कुरुड़ मंदिर से प्रस्थान कर पहले दिन रात्रि प्रवास के लिए कुमजुग गांव पहुंचेगी। इसके बाद डोली कुंडबगड़, लुंतरा, कांडा, खुनाणा, लामसौड़ा, माणखी, चोपड़ाकोट, कांडई, खल्तरा, मोठा, चाका, सेमा, बैरासकुंड, इतमोली, धुबड़खेत, मटई, ग्वाड़, दाणू मंदिर, पगना, भौंधार, चरबंग, ल्वाणी और सुंग होते हुए 12 को डोली रामणी गांव पहुंचेगी। यहां बंड, दशमद्वार और लाता की डोली, जाख देवता की छतोली व बदरीनाथ की छतोली का मिलन होगा। 15 को डोली वाण गांव पहुंचेगी। यहां लाटू व सभी देव डोलियों का मिलन होगा। 16 को सभी डोलियां रणकधार, गैरोली पातल, डोलीधार, वेदनी होते हुए 20 को होमकुंड पहुंचेगी। 23 को माता की डोली कुरुड़ मंदिर में विराजमान हो जाएगी।

वहीं, 5 सितंबर को बंड क्षेत्र की डोली कुरुड़ मंदिर से विदा लेकर रात्रि प्रवास के लिए मैठाणा पहुंचेगी। जिसके बाद डोली चमोली, क्षेत्रपाल, बिरही, बाटुला, श्रीकोट, ल्वाह, दिगोली नंदा देवी मंदिर, गडोरा, तल्ला अगथला, नौरख, मल्ला अगथला, रैतोली, कम्यार, किरुली, गौणा गांव होते हुए 12 को रामणी गांव पहुंचेगी। 20 को होमकुंड में पूजा-अर्चना के बाद डोली सुतोल और फरखेत गांव होते हुए 23 सितंबर को कुरुड़ मंदिर में विराजमान हो जाएगी।

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