शाबास: चमोली के इस छात्र के मॉडल को देख खुश हुए नासा के वैज्ञानिक रॉबर, इनाम में दिए 5800 डॉलर–

by | Feb 28, 2026 | चमोली, ब्रेकिंग | 0 comments

छात्र ऋषभ न बनाई अनोखी डिवाइस, रॉबर की प्रतियोगिता में हुआ था शामिल, सबने की सराहना–

गोपेश्वर, 28 फरवरी, 2026: चमोली जनपद में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। छात्र-छात्राएं पढ़ाई के साथ ही वैज्ञानिक सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं और रचनात्मक गतिवि​धियों में भी अव्वल हैं। हम यहां बात कर रहे हैं पीएमश्री राजकीय इंटर कॉलेग गोपेश्वर में 11वीं के होनहार छात्र ऋषभ नेगी की। ऋषभ ने एक ऐसा डिवाइस बनाया है जो दूध और चाय में उबाल आने से पहले लोगों को अलर्ट कर देगा। पानी के नि​​श्चित तापमान पर गरम होने पर भी डिवाइस अलर्ट कर देगा। जब ऋषभ ने अपनी यह वीडियो यूट्यूब पर अपलोड की तो नासा के पूर्व वैज्ञानिक अमेरिका मूल के मार्क रॉबर ने उसे 5800 डॉलर का इनाम दिया है। भारतीय मुद्रा में यह करीब पांच लाख रुपये है।

हुआ ये कि नासा के पूर्व वैज्ञानिक मार्क रॉबर कुछ समय पहले भारत आए थे। उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर एक प्रतियोगिता रखी। रॉबर के यूट्यूब पर 78 मिलियन फॉलोवर्स हैं। रॉबर को भारतीय लाेगों की ओर से जुगाड़ से बनाए रचनात्मक क्रिया कलापों की वीडियो बनाना बेहद पसंद है। उन्होंने जुगाड़ से मॉडल तैयार कर उसे उनके यूट्यूब चैनल पर भेजने की प्रतियोगिता रखी। इसमें देशभर के दस लोगों के मॉडल चयनित किए गए। जिसमें ऋषभ का मॉडल भी शामिल है। ऋषभ को मार्क रॉवर ने 5800 डॉलर का इनाम दिया है।

रिषभ के पिता नागेंद्र सिंह कांट्रेक्टर हैं और माता ऊषा देवी गृहणी है। राजकीय इंटर कॉलेज गोपेश्वर के प्रभारी प्रधानाचार्य अनूप खंडूरी का कहना है कि आज हमारे विद्यालय के लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का क्षण है कि हमारे होनहार छात्र रिषभ को उनके अभिनव वैज्ञानिक उपकरण के लिए पूर्व नासा वैज्ञानिक द्वारा 5800 डॉलर का सम्मान प्राप्त हुआ —

यह उपलब्धि केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि यह प्रमाण है कि यदि संकल्प मजबूत हो तो सीमित संसाधन भी सफलता की उड़ान को नहीं रोक सकते; रिषभ ने यह सिद्ध कर दिया कि सोशल मीडिया और मोबाइल केवल समय बिताने का साधन नहीं, बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार का शक्तिशाली माध्यम भी बन सकते हैं; तुमने अपने माता-पिता, गुरुओं और पूरे विद्यालय का मान बढ़ाया है, और अन्य विद्यार्थियों के लिए एक जीवंत संदेश दिया है कि बड़े सपने देखो, निरंतर परिश्रम करो और विज्ञान की दिशा में आगे बढ़ो — क्योंकि आज का जिज्ञासु विद्यार्थी ही कल का वैज्ञानिक बनता है। सहयोगी राघव रावत और वेदांत सेमवाल ने एक मॉडल तैयार किया था। जिसकी खूब सराहना हुई थी।

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