अभिभावकों, शिक्षकों व छात्र-छात्राओं ने फूल मालाओं से किया विदा, कहा हमेशा एक प्रेरक शिक्षक व अभिभावक के रुप में गुजरा जीवन–
गोपेश्वर। दशोली विकास खंड के अंतर्गत राजकीय इंटर कॉलेज सावरीसैंण में कार्यरत प्रधानाचार्य सुरेंद्र सिंह रावत 31 मार्च 2026 को अपनी लगभग 36 वर्षों की लंबी, अनुकरणीय एवं समर्पित सेवा पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में एक भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें शिक्षकों, अभिभावकों, छात्र-छात्राओं और क्षेत्रवासियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर उन्हें भावभीनी विदाई दी।
कार्यक्रम के दौरान श्री रावत को फूल-मालाओं से सम्मानित किया गया तथा उनके योगदान को याद करते हुए सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य और स्वस्थ, सुखमय जीवन की कामना की। वक्ताओं ने कहा कि श्री रावत न केवल एक कुशल प्रशासक रहे, बल्कि उन्होंने एक आदर्श शिक्षक के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

सुरेंद्र सिंह रावत का जन्म 01 जनवरी 1966 को नंदप्रयाग के ग्राम पाणीगैर में एक साधारण किसान परिवार में हुआ। आर्थिक अभाव और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा जीआईसीनंदप्रयाग से पूरी की। इसके बाद उन्होंने गोपेश्वर स्थित डिग्री कॉलेज से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी कर शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत आधार तैयार किया।

उन्होंने 31 जुलाई 1990 को जीआईसीगैरसैंण में जीवविज्ञान प्रवक्ता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने जीआईसीगौचर(2002–2013) और जीआईसी बछेर (2013–2017) में अपनी सेवाएं देते हुए विद्यार्थियों के शैक्षिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2017 से 2022 तक उन्होंने जीएचएसएसउत्तरौं में प्रधानाचार्य के रूप में कार्य किया और विद्यालय को नई दिशा दी।
वर्ष 2022 से लेकर 31 मार्च 2026 तक उन्होंने जीआईसीसावरीसैंण में प्रधानाचार्य के रूप में उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान किया। उनके कार्यकाल में विद्यालय ने कई उपलब्धियां हासिल कीं और शैक्षिक गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
उनकी ईमानदारी, अनुशासन और शिक्षा के प्रति समर्पण ने उन्हें सभी के बीच अत्यंत सम्मानित बनाया। उनके मार्गदर्शन में पढ़े अनेक विद्यार्थी आज विभिन्न क्षेत्रों में सफलता प्राप्त कर रहे हैं।
विदाई समारोह के अंत में भावुक माहौल देखने को मिला, जब सहकर्मियों और विद्यार्थियों ने उनके साथ बिताए पलों को याद किया। सभी ने एक स्वर में कहा कि श्री रावत का योगदान सदैव याद रखा जाएगा और उनका जीवन नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।


