पढ़ें क्या है मामला, धार्मिक, सांस्कृतिक भावनाओं से अन्याय करने का आरोप–
चमोली। विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना से प्रभावित छोटी काशी हाट गांव के ग्रामीण अब परियोजना के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में हैं। ग्रामीण दोबारा परिवारों को अपने ही गांव में पुनर्वासित करने और प्रसिद्घ लक्ष्मी नारायण मंदिर व अन्य मंदिरों के संरक्षण की मांग उठा रहे हैं।
विश्व बैंक की टीम ने बुधवार को परियोजना प्रभावित छोटी काशी हाट गांव के ग्रामीणों के साथ बैठक की। इस दौरान प्रभावितों ने आरोप लगाया कि परियोजना के लिए गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं के साथ अन्याय किया गया है। टीएचडीसी के साथ विश्व बैंक भी इसके लिए बराबर का दोषी है। अलकनंदा पर चार हजार करोड़ की लागत से निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी (444 मेगावाट) की जल विद्युत परियोजना विश्व बैंक की मदद से बन रही है। केंद्र सरकार परियोजना निर्माण की स्वयं मॉनीटरिंग कर रही है।
परियोजना के पावर हाउस साइड छोटी काशी हाट गांव स्थित है। गांव के पुनर्वास को लेकर ग्रामीण लगातार परियोजना प्रबंधन व जिला प्रशासन पर आरोप लगा रहे हैं कि हाट गांव की भूमि का अधिग्रहण गलत तरीके से हुआ है। अधिग्रहण की प्रक्रिया में गांव के सभी लोगों को शामिल नहीं किया गया। ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल की शिकायत पर बुधवार को विश्व बैंक की टीम पीपलकोटी पहुंची।
ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें विस्थापन के लिए मजबूर किया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विश्व बैंक ने ग्रामीणों की मूल भावनाओं व सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक भावनाओं के साथ घोर अन्याय किया है। बैठक में ज्येष्ठ प्रमुख पंकज हटवाल, वन सरपंच सोहन कुमार, युवक मंगल दल अध्यक्ष अमित गैरोला, उप प्रधान पिंकी, वार्ड सदस्य हेमा देवी, पंकज कुमार, शशि, नरेंद्र प्रसाद, नरेंद्र पोखरियाल आदि मौजूद थे। ग्राम प्रधान राजेंद्र हटवाल ने कहा कि ग्रामीणों की जल्द एक बैठक आयोजित होगी, जिसमें मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।


