सरकारी जांच में सामने आ रहे कई तथ्य, 17 छूटे कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति करने का भी बढ़ा दबाव–
चमोलीः श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति में नियुक्ति से लेकर पदोन्नति, अस्थाई कर्मचारियों की वेतन आदि से संबंधित बड़ा गड़बड़झाला सामने आ रहा है। जैसे-जैसे सरकार की जांच आगे बढ़ रही है, समिति के बड़े अधिकारियों पर सुई अटक जा रही है। अब देवस्थानम बोर्ड गठन से पूर्व हुई 17 कर्मचारियों की नियुक्ति और बाद में हटाने के बाद पुनर्नियुक्ति को लेकर भी समिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है। ये नियुक्ति पूरी तरह से वैध थी, लेकिन किन्हीं कारणों से कर्मचारियों को बाहर कर दिया गया था, जो अब पुरजोर से समिति और सरकार के सम्मुख नियुक्ति की मांग रख रहे हैं।
इन कर्मचारियों ने कई अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाए हैं। पुनर्नियुक्ति की मांग कर रहे कर्मचारियों ने अब निर्णायक लड़ाई लड़ने की चेतावनी भी दी है। मंदिर समिति के अंदर पिछले लंबे समय से नियम-कानून ताक पर रखकर नियुक्ति, पदोन्नति और वेतन वृद्घि की जा रही थी। वरिष्ठता को भी दरकिनार कर चहेतों को लाभ पहुंचाने का कार्य किया गया। कई बड़े अधिकारियों के नाम भी फर्जी नियुक्तियों में सामने आ रहे हैं। इस पर सरकार भी गंभीर हो गई है। मंदिर समिति में कई गड़बड़झाले के बीच अब समिति के 17 कर्मचारियों की नियुक्ति का मामला तूल पकड़ रहा है। इन कर्मचारियों ने सरकार और समिति के सम्मुख अपनी पुनर्नियुक्ति की गुहार लगाई है। कर्मचारियों ने समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह पर आरोप लगाया कि उन्होंने 17 में से एक महिला को मंदिर समिति के नंदप्रयाग में स्थित गेस्ट हाउस में मस्टररोल पर नौकरी दे दी है। जिससे अन्य कर्मचारियों में आक्रोश बना हुआ है।
उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति पूरी प्रक्रिया के तहत हुई है। उन्होंने एक वर्ष तक मंदिर समिति की स्कूलों व कार्यालयों में सेवाएं दी हैं। उन्हें किन कारणों से हटाया गया और अब बार-बार आश्वासन के बावजूद पुनर्नियुक्ति क्यों नहीं दी जा रही है। कर्मचारियों ने मंदिर समिति में कई अन्य नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए हैं, जिन्हें वे समय पर शासन पटल पर रखेंगे। कर्मचारियों को देवस्थानम बोर्ड भंग होने के बाद नियुक्ति देने का आश्वासन शासन व समिति की ओर से दिया गया, लेकिन आज तक उन्हें नियुक्ति नहीं मिली है। जिससे कर्मचारियों का मानसिक उत्पीड़न हो रहा है।


