20 हजार तीर्थयात्री बने कपाट खुलने के साक्षी, जय बदरीनाथ के जयकारों से गूंज उठा बदरीनारायण का धाम–
बदरीनाथ (चमोली):चारधामों में सर्वश्रेष्ठ बदरीनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल के लिए खोल दिए गए हैं। जिस वक्त बदरीनाथ धाम के कपाट खुल रहे थे, उस वक्त धाम में झमाझम बारिश हो रही थी, बावजूद इसके तीर्थयात्रियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। तीर्थयात्रियों ने बारिश के बीच भगवान बदरीनाथ के दर्शन किए। जैसे ही धाम के कपाट खुले तो जय बदरीनाथ के जयघोष से संपूर्ण बदरीशपुरी गुंजायमान हो उठी। भगवान बदरीनाथ के दर्शनों को देर रात से ही तीर्थयात्री लाइन में खड़े हो गए थे। सुबह तक दर्शनों की लाइन कई किलोमीटर दूर तक पहुंच गई थी। बदरीनाथ में पहले दिन करीब 20000 तीर्थयात्रियों ने बदरीनाथ भगवान के दर्शन किए।

बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया प्रात: पांच बजे से शुरू हो गई थी। बदरीनाथ के सिंहद्वार के दोनों ओर संस्कृत महाविद्यालय बनारस और वेद वेदांत संस्कृत महाविद्यालय जोशीमठ के छात्रों ने स्वस्ति वाचन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया। धार्मिक परंपरानुसार बामणी गांव के नंदा मंदिर से कुबेर जी की डोली हक-हकूकधारियों और आचार्य ब्राह्मणों के साथ बदरीनाथ के दक्षिण द्वार (लक्ष्मी द्वार) से मंदिर के परिक्रमा स्थल में पहुंची।

इसके बाद सुबह पौने चार बजे बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वर प्रसाद नंबूदरी, धर्माधिकारी राधाकृष्ण और बीकेटीसी के अध्यक्ष अजेंद्र अजय मंदिर के मुख्य दरवाजे पर पहुंचे। यहां पर द्वार पूजा के साथ ही छह माह तक धाम के कपाट खोलने को लेकर संकल्प पूजा आयोजित हुई। इसके पश्चात प्रात: छह बजे बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। इसके बाद बदरीनाथ की एक झलक पाने को तीर्थयात्रियों का रैलाउमड़ पड़ा। पूर्वाह्न 11 बजे तक तीर्थयात्रियों ने बदरीनाथ के निर्वाण (बिना श्रृंगार के) दर्शन किए। पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे से बदरीनाथ की अभिषेक पूजा शुरु हुई। अपराह्न तीन बजे बदरीनाथ को भोग लगाया गया।


