चमोली। गंडासू गांव से रात्रि प्रवास के लिए तेफना गांव आते वक्त दशोली की मां नंदा की डोली के साथ चल रहे भक्तों ने जान जोखिम में डालकर नदी को पार कर दिया। नदी के उफान पर होने के बावजूद भी भक्तों की आस्था के आगे आपदा भी नस्मस्तक हो गई। दरअसल, तेफना गांव के समीप मोलागाड नदी में आठ साल पहले पुल बह गया था। तब से ग्रामीण नदी से ही जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। शनिवार को गंडासू गांव से मां नंदा की डोली को रात्रि प्रवास के लिए तेफना गांव जाना था। नदी पर पुल न होने के कारण नंदा भक्तों ने एक दूसरे का सहारा बनकर डोली को उफनती नदी से पार करवाया। भक्तों का कहना है कि मां नंदा की लोक जात यात्रा शुरू होने से पहले ही शासन-प्रशासन से पैदल मार्गों की दशा सुधारने की मांग की गई, लेकिन इस तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। लोकजात यात्रा में शामिल हो रहे भक्तों को कई कठिनाईयों से गुजरना पड़ रहा है। मां नंदा की डोली विभिन्न यात्रा पड़ावों से होते हुए तेफना गांव पहुंच गई है। गांव में देवी भक्तों ने माता की डोली का फूल-मालाओं से स्वागत किया।
आपदा भी आस्था के सामने हुई नत्मस्तक, रास्ता न मिलने पर नदी पार कर पहुंची मां नंदा–
by laxmi Purohit | Sep 4, 2021 | आस्था, चमोली | 0 comments

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