नीती और माणा घाटी के जल, जंगल, जमीन के संरक्षण को होंगे सामूहिक प्रयास–

by | Nov 10, 2024 | उत्सव, चमोली | 0 comments

बिरही में आयोजित हुआ दो दिनों तक जनजाति समागम, समस्याओं पर हुआ मंथन, कई निर्णय लिए, दरवाननैथवाल की सांस्कृतिक संध्या भी हुई आयोजित–

गोपेश्वर, 10 नवंबर 2024: बिरही के बेडूबगड़ में आयोजित जनजाति समागम में कई समस्याओं पर मंथन हुआ। समागम में निर्णय लिया गया कि नीती और माणा घाटी के युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, रीति-रिवाज, बोली-भाषा और खान-पान के बारे में जानकारी दी जाएगी। शीतकालीन और ग्रीष्मकालीन पड़ावोें पर भूमि के अ​धिकार के लिए लंबी लड़ाईलड़ने का निर्णय लिया गया। समागम के अंतिम चरण में गायककारदरवान नैथवाल, गायिका रेखा रावत की सांस्कृतिक संध्या आयोजित की गई। मलारी देवलीबगड़, कोषा, लाता की महिला मंगल दल की महिलाओं ने शानदार कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी।

जनजाति समागम में प्रतिभाग करतीं महिलाएं-

समागम के दूसरे दिन वयोवृद्ध कुंवर सिंह पाल, नारायण सिंह भंडारी और एपल मेन इंद्र सिंह बिष्ट ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान जनजाति के उत्थान के लिए चर्चा-परिचर्चा हुई। जिसमें वि​भिन्न वक्ताओं ने अपने विचार रखे। सबसे पहले नीती और माणा घाटी में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण पर जोर दिया गया। श्रीदेव सुमन विवि के पूर्व कुलपति प्रो. यूएस रावत ने कहा कि जनजाति का इतिहास बेहद पुराना है। इसके संरक्षण के लिए सभी को आगे आने की आवश्यकता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देतीं महिलाएं-

कहा कि सीमांत क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे। निर्धन वर्ग के उत्थान के लिए योजना बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी अपनी बोलीभाषा से विमुख हो रही है, लिहाजा उन्हें प्रतिवर्ष नीती और माणा घाटी के ग्रीष्मकालीन प्रवास स्थलों में कुछ दिन बिताने के लिए प्रेरित किया जाएगा। गढ़वाल विवि के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष डॉ. मनोज रावत ने कहा कि आज भी जनजाति के ग्रामीण भूमिहीन हैं। हमें शीतकालीन व ग्रीष्मकालीन प्रवास स्थलों की भूमि पर हक के लिए लंबी लड़ाईलड़नी होगी। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों के लिए मार्केट उपलब्ध कराया जाना चाहिए। साथ ही दिल्ली, देहरादून के हाट बाजारों में जनजाति के उत्पादों की बिक्री के लिए अलग से स्टाॅल की व्यवस्था होनी चाहिए।

जोशीमठ महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नंदन सिंह रावत, डॉ. राजेंद्र सिंह रावत, लक्ष्मण पल्लव, धामी कोषवाल, राजमति देवी, कुंवर सिंह और सुभम रावत ने भी जनजाति समाज की विभिन्न समस्याओं पर प्रकाश डाला।

इस मौके पर समागम समिति के अध्यक्ष लक्ष्मण सिंंह फरकिया, महासचिव नरेंद्र रावत, रणजीत सिंह बुटोला, लक्ष्मण बुटोला, संयोजक हरीश परमार, देवेंद्र रावत, नंदी राणा, आशीष राणा, ललित पाल, गुलाब बिष्ट, कुलदीप नेगी आदि मौजूद रहे। संचालन सुरेंद्र सिंह और डॉ. नंदन सिंंह रावत ने किया। कार्यक्रम के शुभारंभ में चिपको नेत्री गौरा देवी की स्मृति में आयोजन स्थल पर पर्यावरण प्रेमी शिक्षक धन सिंह घरिया के नेतृत्व में तेजपत्ता और आंवला के पौधों का रोपण किया गया। इस दौरान कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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