आस्था: छह माह ननिहाल में रहने के बाद अपने सिद्धपीठ कुरुड़ में विराजमान हुई मां नंदा–

by | Jan 13, 2026 | आस्था, चमोली | 0 comments

सैकड़ों भक्तों ने किए मां नंदा के दर्शन, मनौतियां मांगी, 25 दिसंबर को देवराड़ा मंदिर से किया था डोली ने प्रस्थान–

नंदानगर (चमोली), 13 जनवरी 2026: छह माह तक अपने ननिहाल देवराड़ा में रहने के बाद मंगलवार को मां नंदा सिद्धपीठ कुरुड़ में ​स्थित अपने मंदिर में विराजमान हो गई है। मां नंदा के जयकारों से कुरुड़ क्षेत्र गुंजायमान रहा। छह माह प्रवास के बाद मंगलवार को मां नंदा अपने सिद्धपीठ कुरुड़ में विराजमान हो गयी। देवी की डोली ने अपने ननिहाल देवराड़ा मंदिर से 25 दिसंबर को प्रस्थान किया था।

मा नंदा राजराजेश्वरी की हर साल लोकजात आयोजित की जाती है। इसमें मा नंदा की डोली अपने ननिहाल देवराड़ा में विराजमान होती है। छह माह वहां प्रवास के बाद देवी की डोली सिद्धपीठ कुरुड़ पहुंचती है और यहां देवी की डोली छह माह तक विराजमान रहती है। इस साल देवी की डोली ने 25 दिसंबर को अपने ननिहाल देवराड़ा मंदिर से प्रस्थान किया। 19 पड़ावों पर रात्रि विश्राम किया,

जिसमें बजवाड़, मेलठा, किमनी, नैल, कुलसारी, नोण, मेटा तल्ला, गैरबारम, बामणगांव, देवपुरी, नागोली, मरोड़ा, हंसकोटी, बैनोली, पैठाणी, सिमली, सणकोट, सैती शामिल हैं। नंदा की डोली हर साल उत्तरायण पर अपने मंदिर में पहुंचती हैं। बुधवार को सूर्य मकर में आ जाते हैं और सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं।

सोमवार को देवी की डोली वापसी के अंतिम पड़ावसैती पहुंची। ग्रामीणों ने फूलमालाओं से देवी की डोली का स्वागत किया। कर्तन भजन का आयोजन किया। मंगलवार को पूजा अर्चना के बाद देवी की डोली सिद्धदेश्वर महादेव मंदिर नंदानगर होते हुए सिद्धपीठ कुरुड मंदिर पहुंची।

जहां देवी की डोली छह माह के लिए विराजमान हो गयी। इस दौरान हल्द्वानी से आए मा नंदा के भक्त सुरेश प्रेमी व उनकी टीम ने भंडारे का आयोजन किया। मंदिर में गौड़ पुजारी मेशचंद्र, मनोहर प्रसाद, किशोर प्रसाद, विजय प्रसाद, पारेश्वर गौड़, दिनेश गौड़ के साथ ही कई भक्तगण मौजूद रहे।

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