गंगा घाट से लेकर योग आश्रम तक महोत्सव की धूम, योग साधक और योग जिज्ञासुओं का हुआ संगम–
ऋषिकेश, 09 मार्च 2026: उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक झलकियों के साथ सोमवार से परमार्थ निकेतन में सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव शुरु हुआ। महोत्सव में विभिन्न देशों के 1500 से अधिक योग साधक व योग विशेषज्ञ जुटे हुए हैं। प्रथम दिवस गंगा आरती के समय योग साधकों ने संगीत, योग, मल्लखंब का लुत्फ उठाया। परमार्थ निकेतन में दिनभर योग सत्र, आध्यात्मिक प्रवचन, वैदिक अनुष्ठान और प्रेरणादायक संगीत आयोजित हुए। योगाचार्य दासा दास ने हठ योग, प्राणायाम और ईरान की योगाचार्य आध्या ने पारंपरिक हठ योग, हठ विन्यास का अभ्यास कराया। कैवल्य धाम योग संस्थान की प्राणायाम विशेषज्ञ संध्या दीक्षित ने योग जिज्ञासुओं को प्राणायाम की शक्ति विषय पर विशेष सत्र आयोजित किया।

योगाचार्य सेंसई संदीप देसाई ने ताई-ची फ्लो सत्र में प्रतिभागियों को संतुलन और आंतरिक शांति का अनुभव कराया। मैट से मिशन तक, कर्मयोग के रूप में जीवन जीना इस विषय पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। ईडन गोल्डमैन ने विशेष संवाद सत्र आयोजित किया। सत्र में योग और आध्यात्मिक जगत के डाॅ. साध्वी भगवती सरस्वती, ईशान तिगुनायत, योगाचार्या शिवा रे, आनंद मेहरोत्रा और टॉमी रोसेन आदि ने विचार व्यक्त किया। संवाद सत्र में वक्ताओं ने बताया कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं है, बल्कि यह सेवा, करुणा, जागरूकता और जीवन के प्रत्येक क्षण में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग है।

दिनभर प्रतिभागियों ने योग की अनेक विधाओं का अनुभव किया, जिनमें मंत्र योग, चक्र बैलेंसिंग विन्यास, विन्यास योग, हृदय-केंद्रित ध्यान सत्र, कुंडलिनी योग तथा योग दर्शन पर गहन चर्चा शामिल रही। नाद योग और साउंड हीलिंग पर आधारित विशेष सेक्रेड साउंड एक्सपीरियंस में प्रतिभागियों ने मंत्र, संगीत और ध्वनि के माध्यम से गहन ध्यान का अनुभव किया।
परमार्थ निकेतन की गंगा आरती के बाद प्रतिभागियों ने भारत की प्राचीन योग परंपरा मल्लखंब का आनंद लिया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव पूरी मानवता को एक सूत्र में जोड़ने वाला वैश्विक आध्यात्मिक संगम है।


