इस अदभुत दृश्य को बढ़ी संख्या में पहुंचते हैं श्रद्धालु, देवशाल गांव के विंदवासिनी मंदिर से देव मूर्तियां जाख मंदिर में पहुंची–
गुप्तकाशी, 15 अप्रैल 2026: आस्था, उत्साह और स्थानीय परंपरा के साथ आज गुप्तकाशी में जाख मेले का भव्य आयोजन होगा। इसकी तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। मेले का आयोजन पूरे विधि-विधान और श्रद्धा के साथ किया जा रहा है। इस मेले को करीब से देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़उमड़ने की उम्मीद है।
मंगलवार को मेले की शुरुआत भव्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ हुई। देवशाल गांव स्थित विंदवासिनी मंदिर से देव मूर्तियों को पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सुसज्जित कंडी में जाखराजा मंदिर परिसर तक लाया गया। इस दौरान गाजे-बाजे, शंख ध्वनि और वैदिक मंत्रों की गूंज के बीच हजारों श्रद्धालु नंगे पांव लगभग डेढ़ किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा कर मंदिर पहुंचे। पूरे मार्ग में भक्ति और उत्साह का माहौल बना रहा।
मंदिर परिसर में रात्रि भर चार पहर की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न हुई। साथ ही यज्ञकुंड में प्रज्वलित अग्नि को निरंतर दो दिनों से जलाए रखा गया है, जो इस धार्मिक आयोजन की विशेष परंपरा का हिस्सा है।
आज बुधवार को मेले का मुख्य आकर्षण देखने को मिलेगा, जब जाख देवता के अवतारी पुरुष नारायणकोटी, कोठियाड़ा और देवशाल होते हुए अपराह्न करीब दो बजे मंदिर परिसर पहुंचेंगे। परंपरा के अनुसार, वे धधकते यज्ञकुंड में नृत्य कर श्रद्धालुओं को आशीर्वाद देंगे। यह अद्वितीय दृश्य हर वर्ष हजारों भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है।
आयोजन समिति से जुड़े हरिओम देवशाली, विनोद देवशाली और महेंद्र देवशाली ने बताया कि जाख देवता मेले का इतिहास पौराणिक काल का है। जो इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को दर्शाता है।
15 अप्रैल को आयोजित यह एक दिवसीय मेला सायंकाल को समाप्त होगा, जिसके बाद देव मूर्तियों को पुनःविंदवासिनी मंदिर में विराजमान किया जाएगा। मेले को लेकर पूरे क्षेत्र में भारी उत्साह है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।


