चमोली। अतिवृष्टि से जगह-जगज क्षतिग्रस्त पड़े निजमुला घाटी के पैदल रास्ते को ग्रामीणों ने श्रमदान कर दुरुस्त कर दिया। ग्रामीणों ने सामूहिक प्रयास से गेंती, फावड़े, कुदाल आदि सामग्री एकत्रित कर पैदल रास्ते का सुधारीकरण कार्य कर लिया। कहीं पुश्ते लगाए गए तो कहीं मलबे का निस्तारण किया गया। 18 और 19 अक्तूबर को हुई अतिवृष्टि से निजमुला घाटी के पाणा गांव में पैदल रास्ता तहस-नहस हो गया था। जिससे ग्रामीणों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही थी। ग्रामीणों ने रास्ता टूटने से हो रही दिक्कत को देखते हुए प्रशासन का मुंह ताकने के बजाय खुद रास्ता बनाने की ठानी और अब गांव के लोग आसानी से उस रास्ते से गुजर रहे हैं। निजमुला घाटी के कई दूरस्थ गांवों में आज भी पैदल रास्ते ही गांवों की लाइफ लाइन है। बीते दिनों हुई अतिवृष्टि से गांवों के पैदल रास्ते तहस-नहस पड़े हुए हैं। पाणा गांव को जोड़ने वाला पैदल आम रास्ता भी सलचोरा, कूल गदेरा और लढुंगा में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। जिससे ग्रामीण आवाजाही नहीं कर पा रहे थे। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन के साथ ही जनप्रतिनिधियों से रास्ते के सुधारीकरण की मांग की, लेकिन ग्रामीणों की मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। जिस पर ग्रामीणों ने स्वयं ही श्रमदान कर रास्ते के सुधारीकरण का निर्णय लिया। दो दिन में ही ग्रामीणों ने एक किलोमीटर दायरे में क्षतिग्रस्त पुश्तों का निर्माण और मलबे का निस्तारण कर रास्ते को आवाजाही के लिए सुगम बना लिया। ग्रामीण हिम्मत फरस्वाण, ताजबर सिंह, उदय सिंह, थान सिंह, मनोज सिंह और लक्ष्मण सिंह ने बताया कि गांव में इन दिनों ग्रामीणों ने खेतों से आलू की खुदाई कर अपने घरों में इसका भंडारण किया है। राजमा दाल भी खेतों से निकाल ली गई है। ऐसे में यदि समय पर फसल समय पर बाजार तक नहीं पहुंचेगी तो उसके खराब होने की आशंका बनी रहती है। साथ ही किसी के बीमार होने पर सड़क तक पहुंचाने के लिए रास्ता सुगम होना बेहद जरुरी था।
पाणा गांव के ग्रामीणों ने सरकार का मुंह ताकने के बजाय श्रमदान से बनाया पैदल रास्ता-
by laxmi Purohit | Oct 24, 2021 | आपदा, चमोली | 0 comments

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