आरक्षित वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग पर होगी कड़ी कार्रवाई, जिलाधिकारी ने दिए निर्देश–
गोपेश्वर, 19 अगस्त 2026: सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में जनपद चमोली में राजस्व विभाग के कब्जे में रही आरक्षित वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग से संबंधित मामलों की जांच एवं आवश्यक कार्रवाई को लेकर जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को सर्वोच्च न्यायालय एवं शासन के निर्देशों के अनुरूप प्रकरणों की गहन जांच करते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा टीएन गोदावर्मन बनाम भारत संघ से संबंधित वाद में पारित आदेशों के अनुपालन में ऐसी आरक्षित वन भूमि, जो किसी निजी व्यक्ति अथवा संस्था को गैर-वानिकी कार्यों के लिए आवंटित की गई हो, की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी क्रम में जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में जनपद स्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। गठित समिति में अपर जिलाधिकारी को सदस्य सचिव, उप जिलाधिकारी ज्योतिर्मठ, चमोली, कर्णप्रयाग, पोखरी, थराली एवं गैरसैंण को सदस्य बनाया गया है। इसके अतिरिक्त प्रभागीय वनाधिकारी, बद्रीनाथ/केदारनाथ वन प्रभाग, गोपेश्वर तथा प्रभागीय वनाधिकारी, नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क, ज्योतिर्मठ को भी समिति में सदस्य नामित किया गया है।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि एसआईटी द्वारा जनपद में राजस्व विभाग के कब्जे में रही आरक्षित वन भूमि के ऐसे सभी प्रकरणों की जांच की जाए, जो किसी निजी व्यक्ति अथवा संस्था को गैर-वानिकी कार्यों के लिए आवंटित की गई हो। उन्होंने भूमि के अभिलेख, आवंटन की स्थिति, वर्तमान कब्जे एवं भूमि के वर्तमान उपयोग का विस्तृत परीक्षण करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यदि आरक्षित वन भूमि का उपयोग निर्धारित वानिकी प्रयोजन के अतिरिक्त किसी अन्य कार्य के लिए किया जाना पाया जाता है, तो शासन एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जिलाधिकारी ने एसआईटी को निर्देशित किया कि जांच से संबंधित दायित्वों का निर्वहन करते हुए प्रत्येक सप्ताह जांच की प्रगति एवं सूचना जिला कार्यालय को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरी जांच प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उपलब्ध राजस्व एवं वन अभिलेखों के आधार पर की जाए।
यदि किसी आरक्षित वन भूमि पर निजी व्यक्ति अथवा संस्था का कब्जा पाया जाता है, तो नियमानुसार भूमि का कब्जा वापस लेकर वन विभाग को हस्तांतरित करने की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, प्रकरणों में शासन एवं न्यायालय के निर्देशों के अनुसार भूमि की लागत की वसूली तथा प्राप्त धनराशि का उपयोग वन संरक्षण एवं विकास कार्यों में किए जाने संबंधी प्रावधानों का भी अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने कहा कि आरक्षित वन भूमि का संरक्षण प्रशासन की प्राथमिकता है और इसके गैर-वानिकी उपयोग से जुड़े मामलों में नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ अभिषेक त्रिपाठी, अपर ज़िलाधिकारी विवेक प्रकाश, परियोजना निदेशक आनंद सिंह सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

