निराशा: नामी गिरामी ह​स्तियों के गांव को आज भी सड़क का इंतजार–

by | May 6, 2023 | चमोली, सड़क | 0 comments

गांव में बचे अब मात्र 20 परिवार, दस सालों में 40 परिवार कर चुके अपने पैतृक गांव से पलायन, लंबी दूरी होने पर गांवों में नहीं हो रहे अब शादी समारोह–

गोपेश्वर: सांस्कृतिक और एतिहासिक गांव सकंड आज सरकार की उपेक्षा का दंश झेल रहा है। इस गांव की कई नामीगिरामी ह​स्तियां देश में उच्च पदों पर तैनात हैं, लेकिन निराशा इस बात की है कि आज तक इस गांव को सड़क से जोड़ने के लिए किसी भी स्तर पर पहल नहीं हुई है। बता दें कि सकंड मूर्धन्य पत्रकार स्वर्गीय चंद्रबल्लभ पुरोहित और स्वर्गीय प्रकाश पुरोहित जयदीप का पैतृक गांव है।

वर्ष 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भेरणी गांव के तंतोली नामक तोक से सकंड गांव के लिए चार किलोमीटर सड़क निर्माण की स्वीकृति दी थी। जिसके बाद सड़क निर्माण के प्रथम चरण के लिए लोक निर्माण विभाग कर्णप्रयाग की ओर से 49.20 लाख का आगणन शासन को भेजा गया, लेकिन आज तक यह आगणन शासन की अलमारियों में धूल फांक रहा है।

आज भी सड़क के अभाव में सकंड गांव के ग्रामीण नंदप्रयाग से करीब पांच किलोमीटर की पैदल दूरी नापने को मजबूर हैं। गांव के लिए खड़ी चढ़ाई, कैंचीदार पगडंडी को पार करने में बुजुर्ग थक चुके हैं। जिससे उनके परिवार अब शहरी क्षेत्रों में बस गए हैं। गांव में अब कुछ ही परिवार रह गए हैं।

गांव में सड़क पहुंचाने के लिए लंबे समय से प्रयासरत सामाजिक कार्यकर्ता हरिप्रसाद ममगाईं, बालकृष्ण पुरोहित, शिवशरण, पूर्व सरपंच इंद्रमणि चमोला, किसान नेता शंभू प्रसाद पंत आदि का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए मुख्यमंत्री से लेकर सांसद, विधायकों को लि​खित और मौ​खिक रुप से अवगत कराया गया है, लेकिन अभी तक भी सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरु नहीं हो पाई है। कहा कि जब तक गांव तक सड़क नहीं पहुंच जाती, संघर्ष जारी रखा जाएगा।

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