पुराना देवल से अगस्य मुनि मंदिर तक आयोजित हुई भव्य शोभा यात्रा, तीर्थयात्री भी बनें यात्रा के साक्षी–
अगस्त्यमुनि: महर्षि अगस्त्य की तपोभूमि अगस्त्यमुनि में वैदिक परंपराओं के साथ अष्टादश महापुराण का श्रीगणेश हो गया है। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ धार्मिक विधि-विधान से भक्तगणों ने 151 जल कलश यात्रा के साथ शोभा यात्रा निकाली। इस दौरान दिनभर जय अगस्त्म मुनि, जय केदार के जयघोष गुंजायमान होते रहे। विश्व मंगलम महायज्ञ के आयोजन की तैयारियां पिछले एक माह से चल रही थी। महायज्ञ का मुख्य आयोजन खेल मैदान अगस्त्यमुनि में हो रहा है।
सोमवार को सुबह करीब नौ बजे पुराना देवल से विजयनगर होते हुए अगस्त्य मुनि मंदिर तक 151 जल कलश यात्रा के साथ शोभा यात्रा निकाली गई। इस दौरान केदारनाथ धाम जा रहे तीर्थयात्री भी शोभायात्रा का हिस्सा बनें। इसके बाद गाजे बाजे के साथ अगस्त्यमुनि महाराज के मंदिर परिसर से 18 पुराण धर्मग्रंथों को महायज्ञ व अष्टादश महापुराण कथा स्थल तक ले जाया गया। यहां यज्ञकुंड में अरणि मंथन से अग्नि प्रज्वलित की गई। यह कार्य कथावाचक आचार्य बृजमोहन सेमवाल और आचार्य डॉ. त्रिलोचन भट्ट की देखरेख में हुआ।
इस मौके पर बदरीनाथ धाम के करपात्री भागवत भागवत प्रपन्नाचार्य जी महाराज, कोटेश्वर मंदिर के महंत स्वामी शिवानंद गिरी जी महाराज, आचार्य डॉ. नंदकिशोर भट्ट, उप आचार्य देवी प्रसाद वशिष्ट, आयोजन समिति के अध्यक्ष धीर सिंह नेगी, संयोजक हर्षवर्धन बेंजवाल, सचिव चंद्र सिंह नेगी, राजेंद्र पुरोहित, थानाध्यक्ष सदानंद पोखरियाल, विजय सिंह नेगी आदि मौजूद रहे। इस दौरान आयोजन समिति की ओर से प्रकाशित विश्वमंगलम महायज्ञ एवं अष्टादश महापुराण स्मारिका का विमोचन भी किया गया।


