सरकार पर लगाया अनदेखी का आरोप, स्कूलों में योग को अनिवार्य विषय घोषित करने व नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग उठाई–
चमोलीः प्रदेशभर के योग प्रशिक्षितों में सरकार की कार्यप्रणाली से नाराजगी और आक्रोश है। कहा गया कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। प्रशिक्षितों ने स्कूलों में योग को अनिवार्य विषय घोषित करने के साथ ही शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग पर शिक्षा निदेशालय परिसर में धरना-प्रदर्शन शुरू करने का निर्णय लिया है। योग प्रशिक्षित संघ ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का पुरजोर विरोध किया है। इसके लिए प्रशिक्षितों को एकजुट किया जा रहा है। योग प्रशिक्षित महासंघ ने एलान किया कि अब नियुक्ति को लेकर निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी।
उत्तराखंड में योग प्रशिक्षितों की लंबी लाइन लग गई है। तकरीबन 60 हजार प्रशिक्षित नियुक्ति की आस लगाए बैठे हैं। पूर्व में सरकार ने योग को अनिवार्य विषय के रुप में शामिल करने का निर्णय भी कैबिनेट में पास कर दिया था। लेकिन अभी तक भी इस ओर कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है। योग प्रशिक्षित संघ के अध्यक्ष अमित नेगी, उपाध्यक्ष दीपक, वंदना बिष्ट, मनोज सिंह, नितिन पंवार, श्वाति रावत, सुमन बिष्ट आदि का कहना है कि लंबे समय से योग प्रशिक्षित नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
स्कूलों में योग को अनिवार्य विषय घोषित करने की मांग है, लेकिन अभी भी इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है। कहा गया कि विश्व विद्यालयों और महाविद्यालयों में साल दर साल योग के डिप्लोमा और डिग्री बांटकर योग प्रशिक्षितों की फौज खड़ी हो रही है, लेकिन नियुक्ति के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं।


