99 वर्ष की आयु में छोड़ा शरीर, जोशीमठ में शोक की लहर–
चमोलीः ज्योतिष्पीठ एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज 99 वर्ष की आयु में ब्रह्मलीन हो गए। उन्होंने सनातन धर्म, देश और समाज के लिए अतुल्य योगदान दिया। रविवार को अपराह्न हृदय गति रुकने से 3 बजकर 21 मिनट पर वे ब्रह्मलीन हुए। उनके ब्रह्मलीन होने पर जोशीमठ के साथ ही संपूर्ण बदरीनाथ क्षेत्र में शौक की लहर है। स्वामी जी से करोड़ो भक्तों की आस्था जुडी हुई है।
स्वामी जी स्वतन्त्रता सेनानी, रामसेतु रक्षक, गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करवाने वाले तथा रामजन्मभूमि के लिए लंबा संघर्ष करने वाले, गौरक्षा आंदोलन के प्रथम सत्याग्रही, रामराज्य परिषद के प्रथम अध्यक्ष, पाखण्डवाद के प्रबल विरोधी रहे थे। उक्त सूचना पूज्यपाद ब्रह्मीभूत शंकराचार्य जी के तीनों प्रमुख शिष्यों स्वामी सदानन्द सरस्वती, स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती एवं ब्रह्मचारी सुबुद्धानन्द जी द्वारा दी गयी है।
स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती वर्ष 1973 में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य और 1981 में द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य पद पर अभिषिक्त हुई थे। तब से लेकर वे दोनों पीठों पर निरंतर आचार्य पद पर सुशोभित थे। शंकराचार्य के निधि सचिव स्वामी सुबोधानंद सरस्वती की ओर से उनके निधन का आधिकारिक पत्र जारी किया गया।
शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के निधन पर धार्मिक सामाजिक एवं राजनीतिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। चार धाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत प्रवक्ता डॉ बृजेश सती ने कहा कि शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती का धार्मिक क्षेत्र में यह भी उल्लेखनीय कार्यों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने चारों धामों के तीर्थ पुरोहितों की ओर से उनके निधन पर अपनी संवेदना व्यक्त की।

