जय हिंद: भारत-तिब्बत के बीच एतिहासिक रिश्तों पर भारतीय सेना ने लैंसडाउन में आयोजित की संगोष्ठी, प्रबुद्धजन जुटे–

by | Sep 26, 2025 | कोटद्वार, ब्रेकिंग | 0 comments

आपस में जुड़ीजड़ें: साझा भारत-तिब्बती विरासत विषय पर आयोजित हुई संगोष्ठी–

लैंसडाउन, 25 सितंबर 2025: गढ़वाल राइफल्स रेजिमेंटल सेंटर, लैंसडाउन के सुरजन सिंह ऑडिटोरियम में आज भारतीय सेना की सेंट्रल कमान ने आपस में जुड़ीजड़ें: साझा भारत-तिब्बती विरासत विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया। इस अवसर पर सेना के वरिष्ठ अधिकारी, राजनयिक, शिक्षाविद और रणनीति से जुड़े विशेषज्ञ मौजूद रहे।

इस संगोष्ठी का उद्देश्य था भारत और तिब्बत के बीच सदियों से चले आ रहे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संबंधों को समझना और आज के दौर में उनकी प्रासंगिकता पर चर्चा करना। खासतौर से गढ़वाल और उत्तराखंड जैसे सीमावर्ती इलाकों की बात करें, तो यहां की संस्कृति तिब्बत से हमेशा जुड़ी रही है। प्राचीन व्यापार मार्ग जैसे निति, माना और लामखागा न केवल व्यापार के लिए, बल्कि तीर्थ और सांस्कृतिक संवाद के लिए भी बेहद अहम थे।

मुख्य वक्ता लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा, चीफ ऑफ स्टाफ, सेंट्रल कमान ने अपने संबोधन में कहा कि सैन्य तैयारी के साथ-साथ सीमावर्ती क्षेत्रों की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समझ भी उतनी ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमारी सुरक्षा की रणनीति को हमारी सभ्यता और विरासत के साथ जोड़कर देखने की जरूरत है।

संगोष्ठी में अलग-अलग सत्रों में कई अहम मुद्दों पर बात हुई जैसे पारंपरिक सीमाओं की अवधारणा, भारत-तिब्बत के बीच बौद्ध संस्कृति और कला का प्रभाव, और 1960 के बाद पहाड़ी समाज में हुए बदलाव। पैनल चर्चा में चीन की बढ़ती रणनीतिक गतिविधियों, तिब्बत की पर्यावरणीय स्थिति, और भारत-चीन रिश्तों के भविष्य पर भी विचार किया गया।

समापन सत्र में लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा, जीओसी, उत्तर भारत एरिया ने कहा कि हमें अपनी सीमाओं को सिर्फ नक्शे पर नहीं, ज़मीन और समाज के साथ जोड़कर देखना चाहिए। उन्होंने इस बात की सराहना की कि सेना, समाज और शिक्षा जगत के बीच ऐसा संवाद समय की जरूरत है।

कार्यक्रम का समापन इस भाव के साथ हुआ कि “सीमाएं भले ही नक्शे बनाएं, लेकिन साझा विरासत ही हमारी असली पहचान और दीर्घकालिक सुरक्षा की नींव होती है।”

Latest News

जय बदरीनाथ: शरद पूर्णिमा पर फूलों से सजा बदरीनाथ मंदिर, श्रद्धालुओं की संख्या 21 लाख पार–

कपाट बंद होने में चंद दिन शेष, यात्रियों की संख्या 22 लाख के पार पहुंचने की उम्मीद-- बदरीनाथ। शरद...

चमोली: इंटर स्कूल प्रतियोगिता में ज्योति विद्यालय विजेता–

पांच विद्यालयों के 60 छात्र-छात्राओं ने निबंध, भाषण, अंग्रेजी कविता और कला प्रतियोगिता में किया...

चमोली: सामूहिक विकास व आत्मनिर्भता का माध्यम है सहकारिता–

जिला सहकारी बैंक की बैठक में अध्यक्ष गजेंद्र सिंह रावत ने सहकारिता को बढ़ावा देने पर दिया जोर...

जय बदरी-जय केदार: देवभूमि की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को रखें संरक्षित: राज्यपाल–

राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने किए बदरीनाथ और केदारनाथ के किए दर्शन-- बदरीनाथ/केदारनाथ। राज्यपाल डॉ...

चमोली: शादी की याद में नवदंपती ने रोपा समलौण पौधा–

समलौण आंदोलन के तहत आयोजित किया गया कार्यक्रम, अभी तक सैकड़ों जगहों पर पौधरोपण कर चुकी हैं संयोजिका...

चमोली: अक्षत नाट्य संस्था ने गढ़वाली बोली में किया चक्रव्यूह का मंचन, अब देहरादून विरासत में गरजेंगा कौरव दल–

अभिमन्यु वध का मार्मिक मंचन देख नम हुईं दर्शकों की आंखें-- गोपेश्वर, 25 अक्टूबर 2026: गोेपेश्वर के...

कार्रवाई: नशे में वाहन चलाना पड़ा अगस्त्यमुनि के युवा को भारी–

बिना डीएल और जरूरी दस्तावेजों के वाहन दौड़ा रहा चालक गिरफ्तार, वाहन सीज-- पोखरी (चमोली)। सड़क...

चमोली: पुलिस स्मृति दिवस पर बलिदानियों को दी श्रद्धांजलि–

पुलिस लाइन में पुष्पचक्र अर्पित कर दो मिनट का रखा मौन-- गोपेश्वर। राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस पर...

चमोली: दुर्गम गांवों में नुक्कड़ नाटकों से सरकारी योजनाओं की अलख–

अक्षत नाट्य संस्था के कलाकार लोकगीतों और नाटकों के जरिए ग्रामीणों को कर रहे जागरूक-- गोपेश्वर/देवाल।...
error: Content is protected !!