माणा के काश्तकारों को भरसार में मिलेगा कृषि-बागवानी का प्रशिक्षण–

by | Mar 17, 2026 | खेतीबाड़ी, पौड़ी | 0 comments

​घिंघराण से वानिकी विश्वविद्यालय भरसार पहुंचे काश्तकार, विशेष प्र​शिक्षण मिलेगा–

पौड़ी, 17 मार्च 2026: वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड औद्यानिकी और वानिकी विश्वविद्यालय की ओर से देश के प्रथम गांव माणा गांव के प्रगतिशील काश्तकारों को आधुनिक कृषि और बागवानी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस पहल के तहत माणा-घिंघराण क्षेत्र के 20 काश्तकार मंगलवार को भरसार पहुंच गए हैं, जहां उन्हें चार दिवसीय विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय द्वारा माणा गांव को गोद लेने की योजना का हिस्सा है। विगत 23 नवंबर को विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. परविंदर कौशल ने माणा गांव का दौरा कर यहां कृषि और बागवानी के विकास का संकल्प लिया था। उसी क्रम में अब स्थानीय किसानों को उन्नत खेती के गुर सिखाए जाएंगे।

ग्राम प्रधान धर्मेंद्र चौहान के नेतृत्व में पहुंचे काश्तकारों को आड़ू, कीवी और सेब जैसे फलों के उत्पादन, संरक्षण और विपणन की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही बेमौसमी सब्जियों के उत्पादन की तकनीक भी सिखाई जाएगी, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हो सके।

पूर्व ग्राम प्रधान व सामाजिक कार्यकर्ता पीतांबर मोल्फा ने बताया कि प्रशिक्षण का लाभ न केवल माणा बल्कि शीतकालीन प्रवास स्थल घिंघराण के किसानों को भी मिलेगा। यहां के जनजातीय ग्रामीण परंपरागत खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बेहतर उत्पादन कर सकेंगे।

माणा और घिंघराण क्षेत्र के किसान पहले से ही सेब, आलू, चौलाई, राजमा, बंदगोभी, फूलगोभी और राई सहित कई फसलों का उत्पादन करते हैं। प्रशिक्षण के बाद इन फसलों की गुणवत्ता और उत्पादकता बढ़ने की उम्मीद है।

इस अवसर पर राजेंद्र सिंह, रघुवीर सिंह, सुरेंद्र सिंह समेत कई काश्तकार मौजूद रहे। विश्वविद्यालय की इस पहल से सीमांत क्षेत्रों में कृषि को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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