जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने नगर क्षेत्र में स्थिरीकरण के कार्यों पर उठाए सवाल, डीपीआर सार्वजनिक करने की मांग उठाई–
जोशीमठ। जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा है कि नगर क्षेत्र में चल रहे स्थिरीकरण के कार्यों की डीपीआर को सार्वजनिक किया जाए, आम जनता को भी कार्यों का पता चलना चाहिए, कि काम किस तरह से हो रहे हैं। साथ ही प्रभावितों के पुर्नवास की प्रक्रिया को भी तेज करने की मांग की है। संघर्ष समिति ने शनिवार को ज्योतिर्मठ में मीडिया कर्मियों से वार्ता में कहा कि
लंबे संघर्ष के बाद आपदा प्रभावित ज्योतिर्मठ के स्थिरीकरण के लिए 1640 करोड़ रुपये का पैकेज स्वीकृत किया गया है। वर्तमान में जो कार्य चल रहे हैं उनकी डीपीआर को सार्वजनिक किया जाना चाहिए। ताकि यह पता चल सके कि जो काम हो रहा है वह कितना स्थाई, वैज्ञानिक व भविष्य को सुरक्षित रखने वाला है। जल निकासी और सीवेज को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
वर्तमान में 600 करोड़ रुपये में विष्णुप्रयाग, मारवाड़ी, सुनील, नृसिंह मंदिर में काम चल रहा है, इन क्षेत्रों का चयन किस आधार पर किया गया, जबकि अति संवेदनशील क्षेत्रों में सिंहधार, मनोहर बाग, रविग्राम क्षेत्र हैं। हाल के अध्ययनों से पता चला है कि ज्योतिर्मठ के 80 मीटर नीचे कठोर चट्टान है, ऐसे में 10 से 12 मीटर पर की रॉक बोल्टिंग कैसे सुरक्षित रहेगी। प्रशासन को इन सभी शंकाओं को दूर करना चाहिए। इस दौरान ज्योतिर्मठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती, समिति के अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार, सचिव कमल रतूड़ी, केएन डिमरी, दीपक टम्टा, विनोद शाह, दिपचंद्र, संदीप, रितिक राणा के साथ ही कई लोग शामिल रहे।

