विशेष सत्र न्यायाधीश विंध्याचल सिंह की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में किया पूनम को दोषमुक्त–
गोपेश्वर। विशेष सत्र न्यायाधीश विंध्याचल सिंह की अदालत ने वर्ष 2023 के चर्चित मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी विवाहित महिला पूनम को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। महिला पर आरोप था कि उसने एक नाबालिग पीड़िता का प्रसव अपने नाम से कराया और जन्मे नवजात को मारकर पिंडर नदी में फेंक दिया था।
मामला नंदानगर थाना क्षेत्र के एक गांव से जुड़ा है। पीड़िता के भाई ने 15 अक्टूबर 2023 को थाना नंदानगर में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी 15 वर्षीय बहन, जो उस समय कक्षा 11 की छात्रा थी, के साथ गांव निवासी बलवीर लाल ने कई बार दुष्कर्म किया। आरोप के अनुसार, मार्च 2023 में जब पीड़िता जंगल में गाय चराने जाती थी, उसी दौरान अभियुक्त ने उसके साथ यह कृत्य किया।
तहरीर में यह भी कहा गया था कि घटना का पता चलने पर बलवीर लाल की विवाहित पुत्री पूनम पीड़िता को श्रीनगर अस्पताल ले गई, जहां उसने अपना नाम दर्ज कराकर नाबालिग का प्रसव कराया। प्रसव के दौरान पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया। इसके बाद पूनम पीड़िता और नवजात को कर्णप्रयाग स्थित अपने कमरे में ले गई।
आरोप था कि पूनम ने पीड़िता को दो दिन अपने पास रखने के बाद यह कहकर घर भेज दिया कि वह बच्चे की देखभाल करेगी, अन्यथा गांव में बदनामी होगी। पीड़िता घर लौट गई, लेकिन दो दिन बाद पूनम ने फोन कर बताया कि बच्चा मर गया है और उसने शव को पिंडर नदी में फेंक दिया है।
मामले में नंदानगर पुलिस ने जांच के बाद पूनम को गिरफ्तार कर जेल भेजा और न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान पीड़िता के बयान भी अदालत में दर्ज किए गए। हालांकि, न्यायालय ने पाया कि मामले में पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं और गवाहों के बयानों में विरोधाभास है। इन्हीं आधारों पर अदालत ने आरोपी पूनम को दोषमुक्त करार दिया। आरोपी पूनम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सत्यप्रकाश सती ने पैरवी की।

