नौ साल में 13 हजार और एक साल में 3500 छात्र हुए कम, ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल सबसे ज्यादा प्रभावित–
गोपेश्वर, 25 मई 2026: लोगाें का अपने पाल्यों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने से मोह भंग हो रहा है। जबकि इन विद्यालयों में ड्रेस से लेकर कॉपी, किताब और भोजन तक की व्यवस्था है। बात करें चमोली जनपद की तो इस शैक्षणिक सत्र में यहां 15 राजकीय प्राथमिक विद्यालय बंद हो गए हैं। कई अन्य विद्यालयों में भी छात्र संख्या बेहद कम हो गई है। हैरत की बात यह है कि बंद हुए सभी विद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। शिक्षाविशेषज्ञों का मानना है कि यह पलायन और निजी स्कूलों की ओर बढ़ते रुझान का असर है।
चमोली जिले में पिछले वर्ष जिले में 891 प्राथमिक विद्यालय संचालित हो रहे थे, जबकि इस वर्ष इनकी संख्या घटकर 876 रह गई है। वहीं छात्र-छात्राओं की संख्या में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। वर्ष 2017-18 में प्राथमिक विद्यालयों में करीब 37 हजार छात्र अध्ययनरत थे, लेकिन अब यह संख्या घटकर 23,961 रह गई है। यानी नौ वर्षों में लगभग 13 हजार छात्र कम हुए हैं।
जिले में दशोली विकास खंड में प्रावि मैठाणा प्रथम, जैसाल, ज्योतिर्मठ में फाक्ती, पोखरी में सेमी, रड़ुवा, भदूड़ा, नारायणबगड़ में कोथरा, नंदानगर में हींण तोंदला, गैरसैंण में झुमाखेत तल्ला, नगली, कर्णप्रयाग में पूर्णा, चमोला, भूमिधार, थराली में पैनगढ़, गैरसैंण में उच्च प्रावि मैथान बंद कर दिए गए हैं।
चिंताजनक बात यह है कि केवल एक वर्ष में ही करीब 3500 छात्र सरकारी विद्यालयों से कम हो गए। वर्ष 2025 में छात्र संख्या 27,700 थी, जो इस वर्ष घटकर 23,961 पहुंच गई है।
सरकारी विद्यालयों में निशुल्क पाठ्य-पुस्तकें, गणवेश और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं, इसके बावजूद अभिभावकों का झुकाव निजी स्कूलों की ओर बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था, शिक्षकों की कमी, पलायन और निजी विद्यालयों के बढ़ते प्रभाव को इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
सीईओ आकाश सारस्वत ने छात्र संख्या में गिरावट के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार हो रहे पलायन को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। विद्यालयों में स्मार्ट शिक्षण, गतिविधि आधारित पढ़ाई और इनोवेटिव एजुकेशन पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि छात्र-छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि विभाग के प्रयासों से आने वाले समय में सरकारी विद्यालयों के प्रति अभिभावकों का भरोसा और मजबूत होगा।

