चमोली जिला न्यायालय में विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत ने सुनाया फैसला, पीड़िता को तीन लाख प्रतिकर देने के आदेश–
गोपेश्वर, 29 मई 2026: एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म कर उसे गर्भवती करने के मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश ने आरोपी चचेरे भाई को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी पर 40,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है, जिसका भुगतान न करने पर अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। पीड़िता को कुल 3 लाख 30 हजार रुपये का प्रतिकर देने का आदेश भी दिया गया है।
विशेष सत्र न्यायाधीश विंध्याचल सिंह की अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(n) व 5(j)(ii)/6 के तहत दोषी पाया। उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत एक वर्ष के कठोर कारावास और 500 रुपये के अर्थदंड की भी सजा दी गई। दंड प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत, अधिरोपित अर्थदंड में से 30,000 रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण नियम, 2012 और उत्तराखंड में अपराध से पीड़ित सहायता योजना, 2013 के तहत पीड़िता को 3 लाख रुपये की प्रतिकर धनराशि अदा करने के आदेश भी पारित किए गए हैं। इस मामले में सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुधीर सिंह ने पैरवी की, जबकि उपनिरीक्षक पूनम खत्री ने विवेचना की।
यह है मामला–
विशेष लोक अभियोजक सुधीर सिंह ने बताया कि पीड़िता के पिता ने चमोली पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, 17 सितंबर 2024 को पीड़िता ने पेट दर्द की शिकायत की, जिसके बाद उसे जिला चिकित्सालय गोपेश्वर ले जाया गया। 18 सितंबर 2024 को हुए अल्ट्रासाउंड में पीड़िता के तीन माह की गर्भवती होने का पता चला। पीड़िता ने अपनी मां को बताया कि जून 2024 में उसके चाचा के लड़के ने उसे अपने घर बुलाया और जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। आरोपी ने पीड़िता को किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी भी दी थी।
जांच और दोषसिद्धि —-
पीड़िता के पिता की तहरीर के आधार पर 18 सितंबर 2026 को विनय के विरुद्ध चमोली थाने में भारतीय दंड संहिता और पॉक्सो अधिनियम की धाराओं में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई। विवेचना के दौरान उपनिरीक्षक पूनम खत्री ने अभियुक्त को गिरफ्तार किया। इसके बाद न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 13 गवाहों के बयान दर्ज कराए। न्यायालय ने अभियोजन के तथ्यों को सही पाते हुए अभियुक्त को दोषी ठहराया।

