जय मां नंंदा: टूटे रास्तों और उफनते गदेरों से होकर कैलाश की ओर बढ़ी मां नंदा की डोली–

by | Sep 7, 2026 | आस्था, चमोली | 0 comments

कहीं पुलिया नहीं, कहीं खतरनाक पैदल रास्ते, मथकोट में बहन बालंपा देवी से हुआ मिलन, भावुक हुए श्रद्धालु–

नंदानगर/कुरुड़ (चमोली), 07 सितंबर 2026: मां नंदा की बड़ी जात यात्रा आस्था और परंपरा के साथ ही कठिन राहों की चुनौती भी झेल रही है। कैलाश की ओर बढ़ रही मां नंदा की डोलियों के साथ श्रद्धालुओं को कई स्थानों पर टूटे और जोखिम भरे पैदल रास्तों से गुजरना पड़ रहा है। कहीं गदेरों पर पुलिया नहीं है तो कहीं ऊंचाई वाले रास्तों पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। इसके बावजूद नंदा भक्त जयकारों के साथ डोली को पड़ावों तक पहुंचा रहे हैं।

रविवार को बड़ी जात यात्रा विभिन्न पड़ावों से होते हुए आगे बढ़ी। कुरुड़ की मां नंदा राजराजेश्वरी की डोली चरबंग गांव से होते हुए रात्रि प्रवास के लिए मथकोट गांव पहुंची। मथकोट जाने के दौरान रास्ते में उफनते गदेरे को पार करना श्रद्धालुओं के लिए चुनौती बना। गर्जना करते पानी के बीच भक्तों ने सावधानी से डोली को गदेरे के दूसरे छोर तक पहुंचाया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां नंदा के जयकारे लगाए।

मथकोट पहुंचने से पहले मां नंदा की डोली का अपनी बहन बालंपा देवी से मिलन हुआ। वहीं दशोली की डोली का कुमजुग गांव में बालंपा देवी से मिलन हुआ। दोनों देव डोलियों के मिलन का दृश्य देखकर श्रद्धालु भावुक हो उठे। बड़ी संख्या में ध्याणियां भी यात्रा में शामिल हैं और माता को कैलाश के लिए विदा करने के भावुक क्षणों की साक्षी बन रही हैं।

स्थानीय उत्पाद भेंट कर किया स्वागत

दशोली की डोली लुणतरा और बंड क्षेत्र की डोली बाटुला गांव पहुंची। तीनों डोलियों का ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने जगह-जगह फूल-मालाओं से भव्य स्वागत किया। राजराजेश्वरी माता की डोली के कुंडबगड़ गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने ककड़ी, मुंगरी (मक्का), चूड़ा सहित स्थानीय उत्पाद भेंट किए।

बंड क्षेत्र की डोली मैठाणा से होते हुए चमोली, क्षेत्रपाल, बिरही और कौड़िया होते हुए बाटुला गांव पहुंची। यहां नंदा भक्तों ने डोली का स्वागत किया। बंड विकास संगठन के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी, पूर्व अध्यक्ष शंभू प्रसाद सती, अतुल शाह, दीपक पंत, अयोध्या हटवाल और हरीश पुरोहित ने डोली की अगुवाई की। बाटुला गांव में पंडित अशोक गौड़ ने विशेष पूजा-अर्चना कराई। ग्रामीणों ने माता की डोली को अर्घ्य अर्पित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

आस्था के आगे भारी पड़ रही रास्तों की मुश्किल

बड़ी जात यात्रा के पड़ावों तक पहुंचने वाले पैदल रास्तों की बदहाल स्थिति श्रद्धालुओं के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। बारिश से कई स्थानों पर रास्ते टूटे हैं। गदेरों में पानी का बहाव तेज होने से डोली को पार कराना जोखिम भरा हो रहा है। ऊंचाई वाले पैदल रास्तों पर सुरक्षा के इंतजाम भी पर्याप्त नहीं हैं। इन मुश्किलों के बीच भी श्रद्धालुओं की आस्था कमजोर नहीं पड़ी है और वे मां नंदा की डोली को जयकारों के साथ कैलाश की ओर ले जा रहे हैं।

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