अन्नकूट, घी और श्वेत कंबल से स्वयंभू लिंग को दी समाधि, शिव भक्तों ने लगाए जयकारे–
गोपेश्वर, 17 अक्टूबर 2026: हिमालय क्षेत्र में स्थित चतुर्थ केदार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट शनिवार को विधि-विधान से बंद हो गए। भगवान रुद्रनाथ के दर्शनों को पहुंचे श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो उठा। शाम पांच बजे से रुद्रनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की प्रक्रिया शुरू हुई और रात करीब आठ बजे मंदिर के कपाट विधि-विधान से बंद कर दिए गए। रुद्रनाथ भगवान के स्वयंभू लिंग को अन्नकूट, घी और श्वेत कंबल से समाधि दी गई। 18 अक्टूबर को भगवान की डोली ज्वाला मंदिर देवलधार में रात्रि प्रवास करने के बाद 19 को डोली गोपीनाथ मंदिर पहुंचेगी।
शनिवार को भगवान रुद्रनाथ की विशेष पूजाएं आयोजित हुई। पंडित आचार्य हरीश भट्ट ने रुद्रनाथ भगवान की अभिषेक और श्रृंगारपूजाएं संपन्न की। मंदिर में रुद्री पाठ आयोजित किया गया।
पंडित वेदप्रकाश भट्ट ने बताया कि 18 अक्टूबर को भगवान रुद्रनाथ की डोली रात्रि प्रवास के लिए ज्वाला मंदिर देवलधार पहुंचेगी। अगले दिन 19 अक्टूबर को डोली अपने शीतकालीन गद्दीस्थल गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर में विराजमान होगी। इसके बाद ग्रीष्मकाल में छह माह तक भगवान रुद्रनाथ की पूजा-अर्चना यहीं संपन्न होगी।

