2.5 किमी हिस्से पर वन भूमि का पेंच डाल रहा अडंगा, फिर आंदोलन के मूड़ में डुमक गांव के ग्रामीण–
गोपेश्वर। चमोली जिला प्रशासन और शासन के सकारात्मक रवैये से कलगोठ गांव से डुमक तक के लिए सड़क निर्माण का रास्ता साफ हो गया। सड़क निर्माण के लिए पीएमजीएसवाई को पर्याप्त बजट भी मिल गया है मगर अब यह सड़क योजना विभागीय नक्शों के फेर में फंस गई है। केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के डिजिटल नक्शे में डुमकसड़क का करीब ढाई किलोमीटर हिस्सा सेंचुरी एरिया में आ रहा है, जबकि राजस्व विभाग के नक्शे में यह क्षेत्र सेंचुरी में दर्ज नहीं है। नक्शों में अंतर के चलते सड़क निर्माण का काम रुक गया है।
डुमक चमोली जनपद का सबसे दूरस्थ गांव है। कलगोठ गांव तक सड़क तो है, मगर यह बेहतर नहीं है। इस कारण आज भी डुमक गांव के ग्रामीणों को अपने गांव तक पहुंचने या अपने गंतव्य तक जाने के लिए करीब 20 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। ग्रामीण उत्तराखंड राज्य का गठन होने के बाद से सड़क की मांग कर रहे हैं। वर्ष 2025 में ग्रामीणों ने विकास संघर्ष समिति के बैनर तले करीब पांच महिनों तक लगातार धरना-प्रदर्शन किया। गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक आंदोलन किया। तब तत्कालीन जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने शासन को प्रस्ताव भेजा। शासन ने डुमक तक सात किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए 8.83 करोड़ रुपये स्वीकृत किए।
सड़क निर्माण के लिए काम शुरू हुआ तो वन विभाग ने सांणीगदेरा और पांगगदेरे के बीच करीब 2.5 किलोमीटर हिस्से को सेंचुरी क्षेत्र में आने का दावा करते हुए काम रुकवा दिया। इसके बाद से वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया में मामला अटका हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क को लेकर एक वर्ष में छह बार संयुक्त निरीक्षण भी हो चुका है, लेकिन अभी तक समाधान नहीं निकल पाया है।
विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह भंडारी, ग्राम प्रधान यमुना देवी और राजवीर नेगी ने कहा कि राजस्व नक्शे में सड़क की भूमि सेंचुरी से बाहर है। करीब 500 मीटर दूर उनकी निजी भूमि है। कहा कि वर्षों से सड़क की मांग कर रहे हैं। शासन से सड़क के लिए धनराशि स्वीकृत होने के बाद भी अब वन क्षेत्र का पेंच आ गया है। ग्रामीणों को अभी भी कलगोठ से डुमक तक करीब सात किलोमीटर पैदल आवाजाही करनी पड़ रही है। विकास संघर्ष समिति से जुड़े लोगों ने एलान किया है कि यदि वन विभाग ने जल्द इस मामले का निपटारा नहीं किया तो आंदोलन तय है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मामले में उच्च अधिकारियों के साथ वार्ता और लिखितरुप से वार्ता चल रही है। जल्द ही इसमें निर्णय लिया जाएगा।

