विजयदशमी पर घोषित हुई कपाट बंद होने की तिथि, 12 नवंबर से शुरू होंगी पंच पूजाएं–
बदरीनाथ। विजयदशमी के अवसर पर बदरीनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की तिथि घोषित कर दी गई है। आगामी 16 नवंबर को रात 9 बजकर 37 मिनट पर विधि-विधान और धार्मिक परंपराओं के अनुसार मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। मंगलवार को मंदिर परिसर में आयोजित समारोह में पंचांग गणना के बाद कपाट बंद होने का मुहूर्त तय किया गया।

धर्माधिकारी आचार्य स्वयंबर सेमवाल, वेदपाठी डॉ. रविंद्र भट्ट और आचार्य वाणी विलास डिमरी ने पूजा-अर्चना के साथ पंचांग गणना की। इसके बाद बदरीनाथ मंदिर के रावल अमरनाथ नंबूदरी ने कपाट बंद होने की तिथि की विधिवत घोषणा की। इस दौरान बीकेटीसी उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती, विजय कप्रवाण, प्रह्लाद पुष्पवान, राजेंद्र डिमरी, रजनीश भट्ट और मुख्य कार्याधिकारी सोहन सिंह रांगड़ मौजूद रहे।
12 नवंबर से शुरू होंगी पंच पूजाएं
बीकेटीसी के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि कपाट बंद होने से पहले 12 नवंबर से पंच पूजाएं शुरू होंगी। पहले दिन गणेश भगवान की पूजा के बाद मंदिर के कपाट बंद किए जाएंगे। 13 नवंबर को आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य मंदिर के कपाट बंद होंगे। 14 नवंबर को खड्ग पुस्तक पूजन के साथ वेद ऋचाओं का वाचन बंद होगा। 15 नवंबर को माता लक्ष्मी को कढ़ाई भोग अर्पित कर भगवान बदरीविशाल के दरबार में आने का न्योता दिया जाएगा।
16 नवंबर को माता लक्ष्मी मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश करेंगी, जबकि भगवान कुबेर और उद्धव को मंदिर परिसर में लाया जाएगा। इसके बाद रात 9 बजकर 37 मिनट पर मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। 17 नवंबर को भगवान उद्धव और कुबेर के साथ आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होगी।
हक-हकूकधारियों को सौंपी जिम्मेदारी
समारोह में आगामी वर्ष 2027 की बदरीनाथ यात्रा के संचालन के लिए हक-हकूकधारियों को जिम्मेदारियां सौंपी गईं। मंदिर की भंडार व्यवस्था के संचालन के लिए मेहता थोक के उमेश भट्ट और शिवम मेहता तथा कमदी-भंडारी थोक के महेंद्र भंडारी और जगदीश पंवार को पगड़ी भेंट की गई। इससे पूर्व मंदिर परिसर में रावल, धर्माधिकारी, वेदपाठी और आचार्यगणों की उपस्थिति में नवरात्र और उर्वशी माता की पूजा-अर्चना के साथ हवन-यज्ञ किया गया।

