चमोलीः हाथों में हल लेकर खेती की उम्मीद जगा रही बेटियां– 

by | Apr 10, 2022 | खेतीबाड़ी, चमोली | 0 comments

– घर के कामकाज, पढ़ाई के साथ ही खेतीबाड़ी में भी जुटी हैं गांवों में बेटियां–

चमोलीः प्रसिद्ध साहित्यकार डॉ नंद किशोर हटवाल की कविता बोये जाते हैं बेटे, पर उग जाती हैं बेटियाँ, खाद पानी बेटों को, पर लहराती हैं बेटियां..चमोली जनपद के गांवों में चरितार्थ हो रही है। भले ही रोजगार के लिए गांवों से पलायन कर लोग खेतों से विमुख हो रहे हैं, लेकिन निजमुला घाटी के ईराणी गांव की कविता और करीना हाथों में हल लेकर न सिर्फ खेती के लिए उम्मीद जगा रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन रही हैं। गांव की अन्य महिलाओं-पुरुषों के साथ ही ये दोनों बहिनें भी घर के कामकाज के साथ ही खेतों में स्वयं हल जोतने का काम भी करतीं हैं।

चमोली जनपद की निजमुला घाटी में अधिकांश परिवार जैविक खेती करते हैं। खासकर ईराणी गांव के आलू की देशभर में मांग है। यहां के आलू कोटद्वार, दिल्ली, ऋषिकेश जैसी मंडियों में भेजे जाते हैं। मंडियों के कई व्यापारी आलू के लिए गांव तक ही पहुंच जाते हैं। इतना ही नहीं, यहां राजमा, चौलाई, जौ, मंडुवा, झंगोरा का भी बेहतर उत्पादन होता है। अमूमन ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में हल जोतने का कार्य पुरुष ही करते हैं, लेकिन ईराणी गांव में पुरुषों के साथ ही महिलाएं भी हल जोतने का काम करतीं हैं।

ईराणी गांव के अवतार सिंह की दो बेटियां कविता और करीना भी इन दिनों आलू की बुवाई करने में जुटी हैं। भाई दिल्ली में प्राइवेट नौकरी करता है, तो पिता के हाथों से हल लेकर दोनों बहिनें अपने खेतों में स्वयं ही हल जोतकर आलू की बुवाई में लगी हैं। कविता का कहना है कि उसका भाई दिल्ली में प्राइवेट सर्विस करता है। वह और उसकी बहन करीना अपने खेतों में स्वयं हल जोतती हैं। आलू बुवाई के दौरान गांव की महिलाएं अपना अधिकांश समय खेतों में ही काम करतीं हैं। गांव की उपजाऊ भूमि है, यहां अनाज के साथ ही आलू का उत्पादन बेहतर होता है। माहेश्वरी देवी का कहना है कि महिलाएं खेती की बारीकियां समझती हैं, इसलिए हल भी ठीक ढंग से लगाकर दोहरी मेहनत से बचती हैं। वे कहती हैं कि कृषिकरण का कार्य फायदेमंद है। गांव के आलू की मैदानी क्षेत्रों से अच्छी डिमांड मिल जाती है, जिस कारण ग्रामीण आलू बुवाई के लिए खेतों में कड़ी मेहनत करते हैं।

ईराणी गांव के ग्राम प्रधान मोहन सिंह नेगी कहते हैं कि गांव की अधिकांश महिलाएं व बेटियां स्वयं खेतों में हल जोतने के साथ ही बुवाई करतीं हैं। कई परिवारों में पु‌रुष रोजगार के लिए मैदानी क्षेत्रों में हैं, तो महिलाएं ही घर के साथ ही खेतों में भी अपना पूरा योगदान देती हैं।

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