बदरीनाथ धाम के रास्ते में हनुमान ने चूर किया था भीम का बलशाली होने का घमंड– 

by | May 11, 2022 | आस्था, चमोली | 0 comments

पढ़ें कहां है यह स्थान, चारधाम यात्रा शुरू हुई तो तीर्थयात्रियों की चहल-पहल भी लगी बढ़ने– 

चमोलीः  उत्तराखंड के चारधामों के कपाट तीर्थयात्रियों के लिए विधि-विधान से खुल गए हैं, साथ ही बदरीनाथ धाम के समीप स्थित हनुमान चट्टी में हनुमान मंदिर भी श्रद्घालुओं के लिए खोल दिया गया है, जिससे यहां तीर्थयात्रियों की चहल-पहल शुरू हो गई है, तीर्थयात्री हनुमान जी के दर्शन करने के बाद ही बदरीनाथ धाम की तीर्थयात्रा शुरू करते हैं, हनुमान मंदिर बदरीनाथ धाम से करीब 12 किलोमीटर पहले अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है, पौराणिक मान्यता है कि इसी स्थान पर हनुमान जी ने महाभारत के दौरान भीम का घमंड चूर किया था. 

मान्यता के अनुसार, महाभारत के दौरान पांडव द्रौपदी के साथ वनवास का समय व्यतीत कर रहे थे और उस समय बदरीनाथ क्षेत्र में ही रह रहे थे, एक दिन अलकनंदा नदी में ब्रह्मकमल बहता देख द्रोपदी ने भीम से ब्रह्मकमल लेकर आने की बात कही, महाबली भीम ब्रह्मकमल पुष्प को लेने के लिए बद्रीवन में प्रवेश करते हैं, तो देखा कि रास्ते में एक वृद्ध वानर लेटा था, वानर की पूंछ से रास्ता रुका हुआ था, भीम उस वानर को रास्ते से हटने के लिए कहा, जिस पर वानर ने कहा कि बुढ़ापे की वजह से मुझमें उठने की शक्ति नहीं है, मुझ पर दया करके इस पूंछ को तुम ही हटा दो और आगे चले जाओ।

इसके बाद भीम ने बहुत कोशिश की, लेकिन वह पूंछ को हिला नहीं सके, तब भीम समझ आ गया कि ये कोई सामान्य वानर नहीं है. तब भीम ने वानर से अपने असली स्वरूप में आने की प्रार्थना की, तब हनुमानजी अपने वास्तविक स्वरूप में प्रकट हुए और भीम को बलशाली होने का घमंड न करने की सीख दी. 

ऋषिकेश से 285 किलोमीटर दूर हनुमान चट्टी में पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी पीपलकोटी के भट्ट ब्राह्मण परिवार के जिम्मे है, शीतकाल में छह माह तक इस मंदिर के भी कपाट बंद कर दिए जाते हैं, जनवरी से अप्रैल माह तक हनुमान चट्टी बर्फ से ढका रहता है. यात्राकाल में श्रद्घालुओं की ओर से मंदिर में भंडारे का आयोजन किया जाता है, हनुमान मंदिर के पुजारी अनसूया भट्ट और संदीप भट्ट ने बताया कि हनुमान मंदिर के दर्शन करने के बाद ही ती‌र्थयात्री बदरीनाथ धाम के दर्शनों को रवाना होते हैं, यहां मंदिर में हनुमान की स्पटिक मूर्ति भजन मुद्रा में विराजमान है. 

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