मेले के लिए आठ कुंतल फूलों से सजा अनसूया माता का भव्य मंदिर–

by | Dec 24, 2023 | आस्था, चमोली | 0 comments

25 और 26 दिसंबर को आयोजित होगा अनसूया मेला, ब्रह्मा, विष्णु, महेश को अपनी कोख में जन्म देने पर संतानदायिनी के रुप में विख्यात हुई माता अनसूया, पढ़ें माता अनसूया की कथा–

गोपेश्वर: 25 और 26 दिसंबर को अनसूया मेला आयोजित होगा। मेला आयोजन के लिए मंदिर को आठ कुंतल फूलों से सजाया गया है। मेले में शामिल होने के लिए कई श्रद्धालु मंडल और गोपेश्वर पहुंच गए हैं। अनसूया माता के मंदिर में प्रतिवर्ष दत्तात्रेय जयंती पर भव्य मेले का आयोजन होता है। अनसूया मेले में देव डोलियों का मिलन विशेष आकर्षण का केंद्र रहता है। 25 को खल्ला गांव से मां अनसूया, बणद्वारा गांव से ज्वाला और कठूड़ गांव से रुद्राणी स्वरुप ज्वाला देवी की डोली अपनी बहन से मिलने जाएंगी। पौराणिक कथा प्रचलित है कि देवलोक में भगवती लक्ष्मी, सती और सरस्वती देवी को अपने पतिव्रत धर्म पर अत्यधिक गर्व हो गया था। तीनों का यह सोचना था कि इस त्रिलोक में कोई भी स्त्री हमसे बढ़कर पतिव्रता नहीं हो सकती।

भक्त वत्सल भगवान ने देवर्षि नारद के मन में प्रेरणा उत्पन्न कर दी। नारद जी घूमते हुए देव लोक पहुंचे और बारी बारी से तीनों देवियों के पास गए। उन्होने भगवान अत्रिमुनि की पत्नी अनसूया के पतिव्रत्य के सामने उनके सतीत्व को नगण्य बताया। तब तीनों ने अपने अपने स्वामियों भगवान विष्णु, महेश और ब्रह्मा से यह हठ किया कि जिस किसी भी उपाय से अनसूया का पतिव्रत भंग होना चाहिए। स्त्री हठ को पूरा करने के लिए तीनों साधु वेश धारण कर महामुनि अत्रि आश्रम पहुंचे। अतिथि रूप में पहुंचे त्रिदेव का सती अनसूया ने आतिथ्य सत्कार किया। किंतु उन्होने कहा कि हम आपका आतिथ्य स्वीकार तभी करेंगे, जब आप निर्वस्त्र होकर हमारे सामने आएं। ऐसी बात सुन कर अनसूया स्तब्ध रह गई। फिर सोचा अतिथि देवतुल्य होते हैं। मुझे उनका सत्कार करना ही है।

अनसूया ने अपने पति अत्री मुनि का ध्यान किया और संकल्प लिया कि यदि मेरा पतिव्रत धर्म सत्य है तो ये तीनों साधु छह-छह मास के शिशु हो जाएं। तब छद्म वेशधारी ब्रह्मा, विष्णु और महेश शिशु रुप में प्रकट हो गए। माता ने उन्हें गोद में लेकर स्तनपान कराया और तीनों अनसूया के पुत्र रूप ही हो गए। जब लंबे समय तक तीनों देव नहीं पहुंचे तो तीनों देव पत्नियां चिंतित हो उठी। तब वे तीनों मां अनसूया के आश्रम पहुंची। अपने पतिदेवों की याचना की। जिस पर देवी अनसूया ने अपने पतिव्रत्य के बल से तीनों देवों को उन्हीं के रुप में प्रकट कर दिया। तब तीनों देवों ने माता अनसूया के गर्व से जन्म लेने का वचन दिया। ब्रह्मा के अंश से चंद्रमा, शंकर के अंश से दुर्वासा तथा विष्णु अंश से दत्तात्रेय का जन्म हुआ। इसके चलते ही हर साल दत्तात्रेय जयंती पर अनसूया मेला आयोजित होता है। माता अनसूया की कृपा सभी पर बनीं रहे। आज भी माता के दर्शनों को देश ही नहीं, विदेशी भी यहां बढ़ी संख्या में पहुंचते हैं।

Latest News

चमोली: समाज हित के कार्यों के लिए चमोली की सेवा और अंकुर संस्थाएं सम्मानित–

पर्यावरण, गौ सेवा और जड़ी-बूटी संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान पर मिला सम्मान...

चमोली: जिला स्तरीय नशा मुक्ति प्रतियोगिता में युवाओं ने दिया जागरूकता का संदेश–

पीजी कॉलेज गोपेश्वर में मेरा भारत चमोली के तत्वावधान में आठ विधाओं में हुई प्रतियोगिता, विजेताओं को...

चमोली: किमाणा में फिर बरसा मलबा, दहशत में बीती ग्रामीणों की रात–

भारी बारिश के बाद खेतों और रास्तों में फैली मिट्टी, प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी; सुरक्षा के स्थायी...

चमोली: दो माह में ही टूटा पिछले सीजन का रिकॉर्ड, फूलों की घाटी में उमड़े पर्यटक–

16,462 पर्यटक पहुंचे, वन विभाग को 30.35 लाख रुपये का राजस्व; बारिश के बाद फिर गुलजार हुई विश्व धरोहर...

चमोली: पर्यटन परिसंपत्तियों के बेहतर संचालन पर जोर, जिलाधिकारी ने पीपीपी मॉडल अपनाने के दिए निर्देश–

स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देते हुए पीपीपी मॉडल से विकसित होंगी पर्यटन परिसंपत्तियां-- गोपेश्वर, 02...

चमोली: बहु-विशेषज्ञ स्वास्थ्य शिविर में 144 लोगों की हुई स्वास्थ्य जांच–

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नंदानगर में आयोजित हुआ बहु विशेषज्ञ स्वास्थ्य ​शिविर, ग्रामीणों को मिली...

चमोली: जिलाधिकारी ने सड़क निर्माण एवं अनुरक्षण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की–

निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ कार्य पूर्ण करने तथा संवेदनशील क्षेत्रों में मशीनरी तैनात...

चमोली: न्याय पंचायत से राज्य स्तर तक होगा खेल महाकुंभ-2026 का आयोजन–

एक सितंबर से खेल महाकुंभ-2026 का आगाज, खिलाड़ियों से पंजीकरण की अपील-- गोपेश्वर, 01 अगस्त 2026: जनपद...

चमोली: पीजी कॉलेज गोपेश्वर में पहाड़ी फूड फेस्टिवल, पारंपरिक व्यंजनों ने मोहा मन–

'अपणु खाणु-अपणु लगाणु, अपणी संस्कृति अपणी पच्छयाण' थीम पर बीएड विभाग का आयोजन-- गोपेश्वर, 01 अगस्त...
error: Content is protected !!