आस्था: जयकारों के साथ शीतकाल के लिए बंद हुए चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट, सुबह ब्रह्म मुहुर्त में शुरू हुई पूजा अर्चनाएं, विधि विधान के साथ कपाट किए गए बंद–

by | Oct 17, 2025 | आस्था, चमोली | 0 comments

पांच सौ से अधिक श्रद्धालु रहे मौजूद, रुद्रनाथ के जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर–

गोपेश्वर, 17 अक्टूबर 2025: चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट शुक्रवार को विधि विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। मंदिर के पुजारी सुनील तिवारी सभी पूजाएं संपन्न करने के बाद सुबह छह बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए। अपराह्न भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में पहुंची। अगली यात्रा में कपाट खुलने तक भगवान रुद्रनाथ की डोली मंदिर में ही विराजमान रहेगी। कपाट बंद होने के दौरान करीब पांच सौ श्रद्धालु मौजूद रहे।

रुद्रनाथ के कपाट बंद होने से पहले सुबह चार बजे ब्रह्म मुहुर्त पर भगवान रुद्रनाथ की पूजा अर्चना शुरू हुई। मंदिर के पुजारी सुनील तिवारी ने भगवान को दूध, घी, दही का लेप लगाया। भगवान श्रृंगार करने के बाद सुबह की पूजा संपन्न की, आरती और भोग लगाने के बाद सुबह ठीक छह बजे मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। उसके बाद साढ़े सात बजे भक्तों के साथ रुद्रनाथ की उत्सव डोली ने वहां से प्रस्थान किया।

पंच गंगा, पितृधार, पनार बुग्याल होते हुए डोली मोली बुग्याल पहुंची। यहां पर भगवान को राजभोग (नए अनाजों का भोग) लगाया गया। जयकारों के साथ डोली अपराह्न करीब चार बजे सगर गांव पहुंची। ग्रामीणों ने ढोल दमाऊ के साथ देव डोली का भव्य स्वागत किया। यहां पर भी भगवान को नए अनाज का भोग लगाया गया।

अपराह्न डोली गोपीनाथ मंदिर पहुंच गयी। भगवान रुद्रनाथ की डोली के दर्शन करने के लिए भारी संख्या में भक्तों की भीड़ लगी रही। रुद्रनाथ जी की डोली ने भगवान गोपीनाथ से मुलाकात की। मंदिर में विशेष पूजा अर्चनाएं करने के बाद देव डोली को मंदिर परिसर में दर्शनों के लिए रखा गया। भारी संख्या में उमड़े लोगों ने भगवान से सुख व समृद्धि का आशीर्वाद लिया। महिलाओं ने भजन कीर्तन किए और भगवान को नए अनाज का अर्घ्य लगाया। इस दौरान गुरुश्रेष्ठ प्रयाग दत्त भट्ट, अमित रावत, जयंती प्रसाद भट्ट, बंशीधर भट्ट, आशुतोष भट्ट, कलराज नेगी, मनीष नेगी आदि मौजूद रहे।

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छह माह तक मंदार के पुष्पों से ढकी रहेगी रुद्रनाथ जी की मूर्ति

– चतुर्थ केदार रुद्रनाथ के कपाट होने के दौरान पौराणिक परंपरा के अनुसार भगवान की मूर्ति को मंदार (स्थानीय भाषा में बुखला) के फूलों से ढकाया जाता है। भगवान की मूर्ति छह माह तक 251 पुष्प गुच्छों से ढकी रहेगी। कपाट खुलने के दिन यह फूल भक्तों को प्रसाद के रूप में बांटे जाते हैं।

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शिव के मुख के होते हैं दर्शन

– चतुर्थ केदार रुद्रनाथ देश का एकमात्र ऐसा धाम है जहां पर भगवान शिव के मुख के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि पांडव जब स्वर्गारोहिणी की यात्रा पर जा रहे थे तब यहां पर पांडवों को भगवान शिव ने दर्शन दिए थे। तभी से यहां भगवान शिवर के मुख के दर्शन होते हैं।

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