विधायक ने कहा, सरकार की न नीति स्पष्ट है न नियत, सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ के लिए किया जा रहा जनता को गुमराह–
गोपेश्वर, 25 अप्रैल 2026: बदरीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार की “न नीति स्पष्ट है, न नियत”, और वह राजनीतिक स्वार्थ के चलते जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार वास्तव में महिलाओं की हितैषी है तो आगामी उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू कर अपनी प्रतिबद्धता साबित करे।
एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में बुटोला ने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर सरकार केवल बयानबाजी कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर इसे लागू करने की कोई ठोस पहल नहीं दिख रही। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन का मुद्दा उठाकर वास्तविक प्रश्नों से ध्यान भटका रही है और महिलाओं के अधिकारों को लेकर गंभीर नहीं है।
बुटोला ने आरक्षण की वर्तमान अवधारणा पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इसका निर्धारण केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि यदि ऐसा किया गया तो पर्वतीय क्षेत्रों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा और इन क्षेत्रों की आवाज कमजोर पड़ जाएगी। उनके अनुसार, भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित आरक्षण व्यवस्था जरूरी है, ताकि सभी क्षेत्रों को समान अवसर मिल सके।
कांग्रेस की भूमिका का उल्लेख करते हुए विधायक ने कहा कि पार्टी ने हमेशा महिलाओं को राष्ट्रीय से लेकर जिला स्तर तक नेतृत्व में स्थान दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पर महिला विरोधी होने के आरोप निराधार हैं और यह केवल राजनीतिक लाभ के लिए फैलाया जा रहा भ्रम है।
इस दौरान कांग्रेस महिला जिलाध्यक्ष ऊषा रावत ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण को लेकर सरकार की मंशा साफ नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन का मुद्दा उठाकर जनता को भ्रमित किया जा रहा है, जबकि वास्तविक उद्देश्य महिलाओं को आरक्षण देने से बचना है।
पत्रकार वार्ता में कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुरेश डिमरी, ब्लॉक अध्यक्ष गोविंद सजवाण, आनंद सिंह राणा, संदीप झिंक्वाण, तेजवीर कंडेरी, अरविंद नेगी, गोपाल रावत, अनिल कठैत, महेंद्र सिंह नेगी के साथ ही अन्य पदाधिकारियों ने महिला आरक्षण को लेकर सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए इसे जनहित का महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।

