सात माह की दिवारा यात्रा पूर्णाहुति के साथ संपन्न, मंदिर में पुनः विराजमान हुई माता की डोली
गोपेश्वर। संतानदायिनी मां अनसूया की सात माह से चल रही पावन दिवारा यात्रा मंगलवार को पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गई। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नम आंखों और जय मां अनसूया के गगनभेदी जयकारों के बीच माता की रथ डोली को विदाई दी। अपराह्न तीन बजे माता की डोली अपने मूल मंदिर में पुनः विराजमान हुई, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
बीते वर्ष 7 अक्तूबर को खल्ला गांव स्थित मां अनसूया मंदिर से दिवारा यात्रा का शुभारंभ हुआ था। इस दौरान माता की रथ डोली ने बदरीनाथ धाम, केदारनाथ, रुद्रनाथ सहित विभिन्न देवालयों और गांवों का भ्रमण कर भक्तों को आशीर्वाद दिया। विशेष रूप से मंडल घाटी की विवाहित बेटियों (ध्याणियों) के गांवों में पहुंचकर माता ने अपने भक्तों को दर्शन दिए।
18 अप्रैल को माता की डोली खल्ला गांव पहुंची, जिसके बाद 19 अप्रैल से लक्ष महायज्ञ और श्रीमद देवी भागवत कथा का शुभारंभ हुआ। व्यास आचार्य पंडित मनोज चमोली ने कथा का रसपान कराया, जबकि यज्ञाचार्य डॉ. चंद्रशेखर तिवारी के नेतृत्व में लक्ष महायज्ञ संपन्न हुआ। 27 अप्रैल को भव्य जल कलश यात्रा ने आयोजन को और अधिक दिव्य बना दिया।
मंगलवार को महायज्ञ और कथा की पूर्णाहुति के बाद मां अनसूया की डोली मंदिर के लिए रवाना हुई। भक्तों ने भावुक होकर माता को विदाई दी। इस दौरान कठूड़ गांव की ज्वाला माता की डोली भी अपने मूल स्थान पर विराजमान हुई।
इस अवसर पर यात्रा समिति अध्यक्ष बीरेंद्र सिंह नेगी, धर्मस्व एवं ग्राम समिति अध्यक्ष अयोध्या प्रसाद त्रिपाठी, नगर पालिका अध्यक्ष संदीप रावत, भेषज संघ के पूर्व अध्यक्ष सतेंद्र असवाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

