मुख्य निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, उत्तराखंड में घट गए लाखों मतदाता, पढ़ें, क्या है वजह–
देहरादून, 15 मई 2026: मृत्यु, विस्थापन, अनुपस्थिति और डुप्लीकेसी की वजह से सालभर में उत्तराखंड में 4,53,459 मतदाता घट गए हैं।
स्थिति यह है कि एक जनवरी 2025 को प्रदेश में कुल मतदाता 84,29,459 थे, जो अब 79,76,000 रह गए हैं। विभिन्न कारणों से मुख्य निर्वाचन विभाग की ओर से लाखों नाम सूची से हटा लिए हैं। एसआईआर के अनुसार, 2025 की तुलना में राज्य में 94 हजार महिला मतदाता घट गई हैं। देशभर के 12 राज्यों में 7.2 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम कटे, दो करोड़ नए जुड़े हैं और 5.2 करोड़ नाम अंतिम सूची से बाहर हुए हैं।
उत्तर प्रदेश-नेपाल बॉर्डर के समीपवर्ती सात जिलों में 17 लाख से ज्यादा मतदाता घटे हैं।
प्रदेश में 2003 के बाद से चुनाव आयोग का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) नहीं हुआ। इस दौरान तमाम ऐसे मतदाता हैं जिनकी मृत्यु या विस्थापित होने के बावजूद मतदाता सूची में शामिल थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रदेश में 84,31,101 मतदाता थे। छह जनवरी 2025 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने जो अंतिम मतदाता सूची जारी की थी, उसमें मतदाताओं की कुल संख्या 84,29,459 दर्ज की गई थी।
इस साल जनवरी में मतदाता सूची तो जारी नहीं हुई लेकिन सालभर में चुनाव आयोग ने एएसडी (एब्सेंट, शिफ्टेड, डेथ) सूची पर काम किया। साथ ही डुप्लीकेसी सॉफ्टवेयर की मदद से दो जगह से नाम हटाकर एक जगह किया गया। लिहाजा, 4,53,459 मतदाता कम होने के बाद वर्तमान में प्रदेश में 79,76,000 मतदाता रह गए हैं।
प्रदेश में बड़े पैमाने पर प्री एसआईआर के तहत बीएलओ मैपिंग का काम हुआ। 79,76,000 मतदाताओं में से 70 लाख की मैपिंग तो पूरी हो गई है। 9,76,000 मतदाता ऐसे हैं, जिनका 2003 की मतदाता सूची का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया। अब एसआईआर के दौरान इन सभी को गणना प्रपत्र दिए जाएंगे, जिस पर उन्हें 2003 के वोट से संबंधित जानकारी देनी होगी। जानकारी न देने पर या उनकी जानकारी से ईआरओ संतुष्ट न होने पर नोटिस जारी होगा, जिसके बाद उन्हें जवाब देना होगा। जवाब ठीक न हुआ तो वोटर लिस्ट से नाम हटा दिया जाएगा।

