रस्स करो- आगे जाकर मारो..शार्ट गन से मारो, ये क्या सीख रहे हैं हमारे बच्चे.. क्या सोचा था, क्या हो रहा है, पढें पूरी खबर–

by | Jul 27, 2021 | चमोली, समस्या | 0 comments

  – मनोज रावत 
चमोली। कोरोना संक्रमण ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त तो किया ही है, साथ ही बच्चों के जीवन को भी अंधकार में धकेल रहा है। स्कूलें बंद होने के कारण सरकारी व निजी विद्यालयों में ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई, पर यह क्या, बच्चे पढ़ाई में कम और गे‌म खेलने में ज्यादा मशगूल हैं। अभी भी वक्त है, बच्चों की काउंसलिंग करें, ऑन लाइन पढ़ाई समाप्त होने के बाद बच्चों के हाथों से मोबाइल लेकर उनका ध्यान पढ़ाई के साथ ही अन्य कार्यों में लगाएं, अधिक से अधिक समय बच्चों के साथ बिताएं। पेरेंट्स अभी नहीं संभले तो बच्चों का ‌भविष्य चौपट होने में देर नहीं लगेगी। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण पूरी तरह से हावी हो गया था। बच्चों के साथ पूरा परिवार घरों में कैद होकर रह गया। बच्चे बाहर जाने की जिद्द करते तो उन्हें माबाइल फोन देकर चुप कराया गया। आज वही मोबाइल फोन बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने में लगा हुआ है। बच्चे पढ़ाई के बजाय ऑन लाइन गेमिंग में अधिक रुचि ले रहे हैं। बच्चे फोन पर पबजी, कॉल ऑफ ड्यूटी, फ्री फायर, माइन क्राफ्ट, क्लेश ऑफ क्लेन, यू ट्यूब ब्लॉगस, वीडियो देख रहे हैं। फ्री फायर खेलते-खेलते उन्‍हें पता ही नहीं चलता कि उनके आसपास क्‍या हो रहा है, वे उसी गेम की दुनिया में खो जा रहे हैं और मुंह के बाहर से कहना शुरू कर रहे हैं–रस्स करो-आगे जाकर मारो…शार्ट गन से मारो..आदि बड़बड़ा रहे हैं। वे गेम के माध्यम से नए-नए दोस्त भी बना रहे हैं। ‌ये कौन दोस्त हैं और कहां रहते हैं, ये उन बच्चों को भी मालूम नहीं है। अभिभावक इसी जुगत में लगे रहते हैं कि आखिर इस लत को छुड़ाया कैसे जाए। एक रिपोर्ट के मुताबिक स्कूलों में पढ़ाई करने वाले बच्चे जिन्हें इस तरह के ऑनलाइन गेम्स की लत लग चुकी है वे अमूमन 3 से 4 घंटे तक खेलने में समय बिताते हैं। एक अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक बच्चे मोबाइल पर अपने दोस्तों के साथ ऑनलाइन पब्जी खेलने में व्यस्त हो जाते हैं। एक छात्र ने तो यहां तक बताया कि जिस समय में वे गेम्स नहीं खेल रहे होते हैं उस समय में भी उनके दिमाग में यही गेम चलता रहता है। अभिभावकों व पैरेंट्स की माने तो इस गेम की वजह से उनके बच्चों के व्यवहार में भी बदलाव देखने को मिल रहा है और वे पहले के मुकाबले ज्यादा चिड़चिड़े हो गए हैं।
मनोचिकित्सकों ने आगाह किया है कि डिजिटल लत वास्तविक है और यह उतनी ही खतरनाक हो सकती है जितनी की नशे की लत…। एक चाइल्ड स्पेस्लिस्ट का कहना है कि बच्चे घरों में रह रहे हैं। उन्हें कोरोना से सुरक्षा के लिहाज से बाहर निकालने में अभिभावक परहेज कर रहे हैं। लेकिन बच्चे घर में क्या कर रहे हैं, इसका ख्याल रखना भी अभिभावक को जरुरी है। 
 ———————————-ऐसे छुड़ाएं बच्चों के गेम्स की आदत– -मोबाइल से गेम को अनइंस्टॉल कर दें..- गेम खेलने के समय में किसी दूसरे काम में बच्चे का ध्यान डाइवर्ट करें — आउटडोर गेम्स खेलने के लिए बच्चे को प्रेरित करें — सामाजिक मेल-जोल बढ़ाएं — ऑनलाइन गेम से होने वाले नुकसानों के बारे में बच्चे को समझाएं —  अभिभावक स्वयं मोबाइल फोन देखने के बजाय बच्चों के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं।  —————–ऑनलाइन गेम्स खेलने से ये हो रहा बच्चों में बदलाव– पैरेंट्स के मुताबिक गेम खेलते रहने से बच्चों का पढ़ाई में कम मन लग रहा है। मानसिक तनाव बढ़ने से व्यवहार में बदलाव और हिंसक होने की संभावना, चिड़चिड़ापन का बढ़ना, चिंतित होना या दुखी महसूस करना, नींद में कमी यानि अनिद्रा की समस्या, झूठ बोलने की आदत, परिवार एवं मित्रों से कट जाना आदि… 

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