पढें, क्या है भतूज, केदारघाटी की सभी महिलाएं और पुरुष पहुंचते हैं इस खास दिन पर केदारनाथ–
गुप्तकाशीः केदारनाथ में अन्नकूट (भतूज मेला) आज होगा। इसके लिए केदारनाथ मंदिर को 11 कुंदल गेंदे के फूलों से सजाया गया है। भतूज पर बाबा केदार के स्वयंभू लिंग को पके चावलों से ढककर श्रृंगार किया जाएगा। इस दौरान पूरी रातभर मंदिर के कपाट खुले रहेंगे और श्रद्धालु आराध्य के दर्शन कर सकेंगे। गुप्तकाशी में विश्वनाथ मंदिर में भी भतूज मेला आयोजित होगा। आज सांय को केदारनाथ में आरती के बाद स्वयंभू लिंग को पके चावलों से ढककर उसका श्रृंगार किया जाएगा। इस खास दिन में सम्मलित होने के लिए केदारघाटी की महिलाएं व पुरुष केदारनाथ जाते हैं। बहनें यहां अपने भाईयों पर राखी बांंधकर सुख समृद्घि की कामना करतीं हैं।
चार पहर पूजा-अर्चना होगी। साथ ही भक्तों के दर्शनार्थ मंदिर के कपाट रातभर खुले रहेंगे। 11 को यानि रक्षाबंधन पर्व पर स्वयंभू लिंग पर लगे पके चावलों को उतारकर मंदाकिनी नदी में प्रवाहित किया जाएगा। इस मौके पर केदारनाथ मंदिर के पुजारी टी. गंगाधर लिंग, आचार्य ओंकार शुक्ला, केदारनाथ मंदिर के प्रभारी आरसी तिवारी, प्रशासनिक अधिकारी वाईएस पुष्पवाण मौजूद थे। विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी में भी 11-गांव रामलीला समिति द्वारा भतूज मेला को भव्य रूप से मनाया जा रहा है। मान्यता है कि भगवान शिव नये अनाजों से जहर को जनकल्याण के लिए खुद में समाहित कर देते है। इसी के तहत स्वयंभू लिंग पर नए धान से तैयार चावलों को पकाकर लगाया जाता है। साथ ही अन्य अनाजों से सजाया जाता है।

