सिद्घपीठ कुरुड़ मंदिर में लगे जय मां नंदा के जयकारे, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम–
गोपेश्वर। विधि-विधान से वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सिद्घपीठ कुरुड़ मंदिर के गर्भगृह से दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियां मंदिर के मंडप में विराजमान हैं सोमवार को शुभ मुहुर्त में मां नंदा की दोनों डोलियां कैलाश के लिए विदा हो जाएंगी। मंदिर परिसर में तीन दिवसीय नंदा लोकजात, सांस्कृतिक मेले में भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम है।
रविवार को सुबह पांच बजे से ही मां नंदा के मंदिर में गौड़ ब्राह्मणों की ओर से मां नंदा की विशेष पूजाएं आयोजित की गई। बारी-बारी से दशोली और बधाण की मां नंदा की पूजा-अर्चना संपन्न की गई। आचार्य ब्राह्मण मंशाराम गौड़, मुंशी चंद्र, कन्हैया प्रसाद, मनोहर प्रसाद, हरि प्रसाद आदि ने मंदिर में पंच पूजा व षोडशोपचार पूजा के बाद मां नंदा की आरती की
महिलाओं ने मंदिर परिसर में झुमेलो नृत्य कर मां नंदा के जागर गाए। मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला ने बताया कि सोमवार को मां नंदा बधाण की डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए नंदा सप्तमी को वेदनी पहुंचेगी, जबकि दशोली की मां नंदा की डोली बालपाटा पहुंचेगी।
पर्यटन और सांस्कृतिक गांव कुरुड़ में तीन दिवसीय नंदा लोकजात सांस्कृतिक मेला भी चल रहा है। कर्नल (से.नि) हरेंद्र सिंह रावत और जिला पंचायत सदस्य नंदिता रावत ने मेले का विधिवत रुप से शुभारंभ किया। नंदानगर के विभिन्न शिक्षण संस्थाओं के छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां दी। इस मौके पर ग्राम प्रधान रेखा गौड़, मंशाराम गौड़, नरेश, सुरेंद्र सिंह, श्याम सिंह रावत, देवेश्वरी देवी, कमलेश गौड़, राजेश, पुजारी मुंशी चंद्र, कन्हैया प्रसाद, विजय प्रसाद, मनोजर प्रसाद, हरि प्रसाद आदि मौजूद रहे। मेले का संचालन प्रकाश गौड़ ने किया।

