स्वास्थ्यः 30 सालों से चमोली को स्वस्थ बनाने में जुटे हैं डॉक्टर दंपत्ति–

by | Oct 10, 2022 | चमोली, स्वास्थ्य | 0 comments

  

चमोली में ही तय किया सर्जन से सीएमओ तक का सफर,  जब भी तबादला हुआ लोगों ने आंदोलन कर रुकवाया– 

गोपेश्वरः  सरकारी सेवा में आते ही हर कोई मैदान की तरफ भागना चाहता है, उसके लिए तरह-तरह के जुगत लगाए जाते हैं, लेकिन यहां एक ऐसे चिकित्सक दंपत्ति हैं जो 30 सालों से चमोली जिले में सेवाएं देते हुए लोगों को स्वस्थ बनाने में जुटे हैं।

यहां बात हो रही है उप जिला अस्पताल कर्णप्रयाग में तैनात सर्जन डा. राजीव शर्मा और उनकी पत्नी स्त्री रोग विशेषज्ञ डा. उमा रानी शर्मा की, जिन्होंने चमोली जिले में आने के बाद मैदान का मोह पूरी तरह से त्याग दिया। डा. राजीव शर्मा को हाल ही में चमोली जिले का सीएमओ भी बना दिया गया है।

मूल रूप से मेरठ के धतोली गोविंदपुरी निवासी डा. राजीव शर्मा की पहली पोस्टिंग उत्तर प्रदेश के समय पौड़ी में तैनाती हुई थी। डा. शर्मा बताते हैं कि तत्कालीन एडी स्वास्थ्य डा. आईएस पाल ने 29 फरवरी 1992 को उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्णप्रयाग भेजा। तब से वह इसी चिकित्सालय में तैनात हैं।

पहाड़ में सेवा देने के अनुरोध पर 1994 में उनकी पत्नी डा. उमा रानी शर्मा को भी कर्णप्रयाग भेज दिया गया। तब से दोनों चिकित्सक पति पत्नी कर्णप्रयाग में ही सेवाएं दे रहे हैं। डा. शर्मा बताते हैं कि उन्होंने खुद कभी यहां से तबादले की इच्छा नहीं जताई। हालांकि विभागीय स्तर पर कई बार तबादले हुए, लेकिन लोगों ने आंदोलन कर रुकवा दिए।

डा. शर्मा और उनकी पत्नी ने बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही अच्छे व्यवहार से लोगों के दिलों में ऐसी जगह बना दी कि उन्हें जिले में हर कोई जानता है। यही कारण है कि जब भी उनके तबादले की बात आती है तो लोग उसे रुकवाने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं। 2019 में तो लोगों ने धरना प्रदर्शन तक कर दिया था।

– डा. शर्मा बताते हैं कि शुरू में जिले के दूरस्थ गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं काफी कम थी। गांवों में सड़कें भी नहीं पहुंची थी। तब वह रामणी, बालपाटा जैसे दूरस्थ गांवों में ट्रैकिंग कर पहुंचते थे और लोगों का उपचार करते थे।

– 30 साल की सेवा में डा. राजीव शर्मा अब तक करीब सवा लाख ऑपरेशन करा चुके हैं, जबकि उनकी पत्नी डा. उमा रानी शर्मा 50 हजार से अधिक प्रसव करा चुकी हैं। डा. शर्मा बताते हैं कि जब वह यहां आए थे तो यहां लोग स्वास्थ्य सेवाओं से काफी वंचित थे। तभी उन्होंने निश्चय कर लिया था कि वह यहीं सेवाएं देंगे। यहां से जाने का कभी मन नहीं हुआ। वह कहते हैं कि अब आगे भी मैं पहाड़ में ही रहकर सेवाएं देना चाहता हूं।

बेटा भी पहाड़ में ही करना चाहता है काम

– चिकित्सक दंपत्ति के दो बेटे हैं, जिसमें बड़ा सुमन्यु शर्मा आईआईटी से इंजीनियरिंग कर रहे हैं। जबकि छोटा बेटा ध्रुव एमबीबीएस कर रहा है। वह भी पढ़ाई पूरी कर पहाड़ में ही सेवाएं देने का इच्छुक है।

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