पहले दिन रही भारी अव्यवस्था, पुलिस का ट्रेफिक प्लान रहा फ्लॉप, तीर्थयात्रियों ने झेली फजीहत–
बदरीनाथः अव्यवस्थाओं के बीच बृहस्पतिवार को बदरीनाथ धाम के कपाट खुले। बदरीनाथ धाम में महायोजना के कार्यों के बीच यात्रा का संचालन शुरु हुआ, लेकिन पुलिस की ओर से पर्याप्त इंतजाम न होने से तीर्थयात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
बृहस्पतिवार को बर्फबारी और हेलीकॉप्टर से हुई पुष्पवर्षा के बीच सुबह 7 बजकर 10 मिनट पर बृष लग्न में बदरीनाथ धाम के कपाट खोल दिए गए। चारों ओर वैद मंत्रोच्चरण और जय बदरीनाथ का जयघोष सुनाई दिया। धाम में पहले दिन करीब बीस हजार तीर्थयात्रियों ने भगवान बदरीनाथ के दर्शन किए।
महायोजना के कार्यों के चलते इस बार यात्रा मार्ग को देवलोक होटल से निकाला गया था। लेकिन तीर्थयात्रियों को रास्ता बताने वाला भी कोई नहीं था। जिसके चलते यात्री पुराने रास्ते से ही धाम के नजदीक पहुंच गए, लेकिन यात्रियों को रास्ता बताने के बजाय पुलिस के जवान बैरियर लगाकर तीर्थयात्रियों को रोकने में लगे रहे। यात्री बदरीनाथ भगवान के दर्शनों को लालायित रहे, लेकिन उन्हें दुश्वारियों से जूझना पड़ा।
धाम में सुबह 11 बजे से बदरीनाथ की महाभिषेक पूजा प्रारंभ हुई। पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से हुई। बदरीनाथ धाम में तड़के तीन बजे से ही कपाट खुलने की प्रक्रियाएं शुरु हो गई थी। बदरीनाथ के सिंहद्वार पर वेद वेदांग संस्कृत महाविद्यालय जोशीमठ के 21 छात्रों ने आचार्य डॉ. प्रदीप सेमवाल के नेतृत्व में बदरीनाथ के वेदपाठियों के साथ स्वस्ति वाचन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया।
सुबह पौने छह बजे बामणी गांव के नंदा मंदिर से कुबेर जी की डोली हक-हकूकधारियों और आचार्य ब्राह्मणों के साथ दक्षिण द्वार से बदरीनाथ मंदिर के मुख्य परिसर में पहुंची। इसके पश्चात सवा छह बजे बदरीनाथ के रावल (मुख्य पुजारी) ईश्वर प्रसाद नंबूदरी और धर्माधिकारी राधाकृष्ण थपलियाल मंदिर के मुख्य दरवाजे पर पहुंचे। यहां द्वार पूजा के साथ ही छह माह तक धाम के कपाट खोलने को लेकर संकल्प पूजा संपन्न की गई। करीब आधा घंटे तक चली पूजा-अर्चना के बाद सुबह ठीक सात बजकर 10 मिनट पर बदरीनाथ धाम के कपाट ग्रीष्मकाल में छह माह तक के लिए खोल दिए गए।


