बदरीनाथ से दो किलोमीटर पहले कंचन नाले में नदी की तरह बह रही बर्फ–
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश और बर्फबारी से अब दुश्वारियां बढ़ने लगी हैं। बदरीनाथ धाम के साथ ही हेमकुंड साहिब, नंदा घुंघटी, रुद्रनाथ सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में जमकर बर्फबारी हो रही है। शुक्रवार को देर शाम तक भी बर्फबारी जारी रही। बदरीनाथ धाम के पास कंचन नाले में बर्फ ऐसे बह रही है, जैसे नदी हो। इससे यहां बदरीनाथ हाईवे भी बाधित हो गया है।
बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के कार्यों में जुटे मजदूर मौसम विभाग के अलर्ट के कारण निचले क्षेत्रों में आ रहे थे, लेकिन कंचन नाले में हाईवे बाधित होने से मजदूर फिर से बदरीनाथ धाम पहुंच गए हैं। बदरीनाथ धाम में चारों ओर बर्फ की मोटी चादर बिछ गई है। इधर, हेमकुंड साहिब में भी बर्फबारी हो रही है। नीती और माणा घाटी के गांवों में भी पिछले तीन दिनों से रुक-रुककर बर्फबारी हो रही है, जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश से जन जीवन अस्तव्यस्त हो गया है।
देश का प्रथम गांव माणा भी बर्फ से ढक गया है। नीती घाटी के गांव भी मलारी से आगे बर्फ के आगोश में हैं।
बर्फबारी होने से बदरीनाथ धाम में तीन फीट तक बर्फ जम गई है। कंचन नाले में बर्फ नदी की तरह बह रही है। बर्फ हाईवे से होते हुए अलकंनदा में पहुंच रही है। अत्यधिक बर्फबारी होने से प्रशासन भी अलर्ट मोड़ में आ गया है।
जोशीमठ के उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने अधिकारियों को अलर्ट मोड़ पर रहने और सीमा सड़क संगठन को बदरीनाथ हाईवे को खोलने के निर्देश दिए हैं। बदरीनाथ धाम में रह रहे मजदूरों को सुरक्षित स्थानों में रहने के लिए कहा गया है। वहीं, इस बारिश को गेहूं, जौ की फसल के लिए बेहद लाभकारी माना जा रहा है। हालांकि सेब, नाशपाती, खुमानी, आडू के फूल झड़ने से पैदावारा पर इसका बुरा असर पड़ेगा।


