न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मानसिक व भावनात्मक प्रताड़ना के एवज में 20 हजार रुपये देने के भी दिए आदेश–
रुद्रप्रयाग। न्यायिक मजिस्ट्रेट सिद्धार्थ कुमार की अदालत ने घरेलू हिंसा के मामले में महत्वपूर्ण आदेश सुनाते हुए पति को पत्नी और उसकी नाबालिग बेटी के भरण-पोषण के लिए हर माह 12 हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं। साथ ही पत्नी को रहने के लिए अलग आवास उपलब्ध कराने और मानसिक व भावनात्मक प्रताड़ना के एवज में 20 हजार रुपये एकमुश्त प्रतिकर देने के निर्देश दिए गए हैं।
मामला रुद्रप्रयाग के संगम बाजार निवासी सृष्टि देवी और उनके पति योगेंद्र प्रसाद से संबंधित है। सृष्टि देवी ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर संरक्षण, आवास, भरण-पोषण और प्रतिकर की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि शादी के कुछ समय बाद पति शराब और नशे का आदी हो गया और छोटी-छोटी बातों पर शक करते हुए उनके साथ मारपीट और मानसिक प्रताड़ना करता था। महिला ने पति पर उन्हें और उनकी बेटी को घर से निकालने के प्रयास तथा खर्च न देने के भी आरोप लगाए थे।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्य और जिला संरक्षण अधिकारी की रिपोर्ट का अवलोकन किया। न्यायालय ने माना कि पति की ओर से पत्नी के साथ शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और आर्थिक प्रताड़ना की गई। अदालत ने यह भी पाया कि पति पिछले कुछ समय से पत्नी और बेटी के भरण-पोषण का खर्च नहीं उठा रहा था।
पत्नी को अलग आवास देने के निर्देश
न्यायालय ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम की धारा 19 के तहत पति को निर्देश दिया कि वह संगम बाजार में स्थित आठ कमरों वाले मकान में पत्नी को अलग से दो कमरे, रसोई और शौचालय-बाथरूम उपलब्ध कराए।
इसके अलावा धारा 20 के तहत पत्नी के भरण-पोषण के लिए हर माह 12 हजार रुपये प्रत्येक माह की 10 तारीख तक देने के आदेश दिए गए हैं। धारा 22 के तहत मानसिक और भावनात्मक प्रताड़ना के लिए 20 हजार रुपये एकमुश्त प्रतिकर भी एक माह के भीतर देने के निर्देश दिए गए हैं।
न्यायालय ने आदेश की प्रतियां संबंधित थाने और संरक्षण अधिकारी/बाल विकास परियोजना अधिकारी, अगस्त्यमुनि को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने के निर्देश दिए।

