5000 श्रद्घालु पहुंचे मां नंदा से मिलने, ध्याणियों और महिलाओं ने भेंट की श्रृंगार सामग्री, तीन सितंबर को नंदा सप्तमी..
नंदानगरः पूजा-अर्चना के बाद सोमवार को अपराह्न ठीक चार बजे कुरुड़ मंदिर से दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियां कैलाश के लिए विदा हो गई। मां नंदा के भक्तों ने अपनी आराध्य देवी के दर्शन कर मनौतियां मांगी। मंदिर में मां नंदा से मिलने के लिए करीब 5000 श्रद्घालु पहुंचे थे। नंदा भक्तों ने मंदिर में जागर गाकर अपनी आराध्य देवी को विदाई दी। पड़ावों में देवी भक्तों ने मां नंदा की डोली का फूल-मालाओं से स्वागत किया। क्षेत्र की महिलाओं और ध्याणियों ने मां नंदा को श्रृंगार सामान भेंट किया।
सोमवार को सुबह से ही नंदा के सिद्धपीठ कुरुड़ में भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया था। कुरुड़ गांव के आचार्य ब्राह्मणों द्वारा देव डोलियों पर वेद मंत्रों से शक्ति चढ़ाई गई। अपराह्न दो बजे तक मां नंदा की विशेष पूजाएं संपन्न हुई। तीन बजे दशोली और बधाण की मां नंदा की डोलियों का श्रृंगार किया गया। करीब एक घंटे तक नंदा की आरती हुई। ठीक चार बजे ढोल-दमाऊं की थाप और भाणा-भंकोरों के साथ मां नंदा की डोलियां कैलाश के लिए रवाना हुई।
कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला ने बताया कि तीन सितंबर को नंदा सप्तमी पर बालपाटा और वेदनी बुग्याल में मां नंदा की पूजाएं संपन्न होंगी। उन्होंने बताया कि बधाण की मां नंदा बेदनी बुग्याल में पूजा-अर्चना के बाद अपने ननिहाल पहुंचेगी। मां नंदा यहां छह माह तक प्रवास करेगी।

