चमोली: इंजीनियरिंग कॉलेज गोपेश्वर में शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय सेमिनार–

by | Nov 26, 2025 | चमोली, ब्रेकिंग | 0 comments

200 से अ​धिक शोध पत्र हुए प्रस्तुत,​ उच्च ​शिक्षा सचिव डॉ. रंजीत सिन्हा समेत कई ​शिक्षाविद हुए शामिल–

गोपेश्वर, 26 नवंबर 2025: राजकीय औद्योगिक संस्थान गोपेश्वर में बुधवार से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार शुरू हो गया है। सेमिनार में तकनीकी एवं उच्च शिक्षा सचिव डॉ. रंजीत सिन्हा और श्रीदेव सुमन विवि के कुल सचिव दिनेश चंद्रा के साथ ही कई ​शिक्षाविद शामिल हुए। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा पर विस्तार से बात रखी। कहा कि प्रकृति का उपयोग होना चाहिए उपभोग नहीं।

इंजीनियरिंग काॅलेज में आयोजित सेमिनार के तकनीकी सत्र में बोलते हुए तकनीकी ​व उच्च ​शिक्षा सचिव डॉ. सिन्हा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्वासित और पुर्नविस्थापित करने की जरूरत है। हमारी पारंपरिक भोज शैली, खान-पान, आयुर्वेदिक दवाइयां, परंपराएं, रीति-रिवाज, प्राकृतिक संरक्षण का पारंपरिक तरीका, विश्वास को पुर्नजागृत कर ही सतत विकास किया जा सकता है। सबसे महत्वर्पूण है मानव मात्र का शरीर, हर किसी की अपनी परिभाषा है, उसकी भोजन शैली का हमारे पुराणों में जिक्र है। कहा कि प्रकृति का उपयोग होना चाहिए, उपभोग नहीं करना चाहिए।

हमारा अन्न ही अमृत है, अन्न सही कर दिया तो बीमारियां नहीं होंगी। अन्न का चयन और अन्न का समय सही कर लिया तो बीमारियां दूर रहेंगी। तकनीकी का उपयोग होना चाहिए, लेकिन प्रकृति के दोहन की कीमत पर नहीं। प्राथमिक विद्यालय स्तर से ही भारतीय परंपरा को पढ़ाया जाना चाहिए।

इस अवसर पर कार्यक्रम संयोजक प्रो. अमित जायसवाल, प्रोद्योगिक संस्थान गोपेश्वर के निदेशक प्रो. अमित अग्रवाल, सीडीओ डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, प्रो. नरेश देशमुख, प्रो. सुरेश पांडे, राजेश वी पाटिल, प्रो. विमोलन मुद्ले आदि मौजूद रहे।

संचालन डॉ. डीएस नेगी और डॉ. विधि ध्यानी ने किया। दक्षिण अफ्रिका की वैज्ञानिक यूनिवर्सिटी ऑफ क्वाजुलु नटाल की प्रो. रोनिका मुद्दली ने कहा कि दुनिया में विभिन्न ज्ञाप परंपराएं रही हैं। एक देश की ज्ञान परंपरा दूसरे देश की समस्याओं का हल निकाल सकती है।

इसलिए हमें दूसरे देशों की ज्ञान परंपराओं को भी सीखने की जरूरत है। विश्व में जितनी भी ज्ञान परंपराएं हैं वह सभी मानव कल्याण के लिए बनी हैं। तकनीकी विवि की कुलपति प्रो. तृप्ता ठाकुर ने कहा कि पारंपरिक ज्ञान प्रणाली व आधुनिक तकनीकी के समन्वय से ही सतत विकास की अवधारणा को पूरा किया जा सकता है।

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