चमोली। उत्तराखंड के सीमांत चमोली जनपद में स्थित पर्यटन स्थल गोपेश्वर से मात्र चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है गंगोलगांव। यह गोपेश्वर नगर पालिका का ही एक वार्ड है। यहां मौजूदा समय में 250 परिवार निवास करते हैं। पूरे उत्तराखंड के गांव-गांव जहां बंदरों के उत्पात से परेशान हैं, वहीं, बंदर गंगोलगांव में घुसने से परहेज करते हैं। यदि भूला भटका कोई बंदर गांव में घुस भी गया तो, वह कुछ ही मिनट में गांव से भाग जाता है। गांव के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि जब चमोली जनपद में वर्ष 1999 में विनाशकारी भूकंप आया था तो गंगोलगांव के समीप चाड़ा नामक चट्टान का एक हिस्सा टूट गया था। इस चट्टान के ऊपरी क्षेत्र में स्थित पेड़ों पर बंदरों की टोली बैठी हुई थी, जो चट्टान टूटने के साथ ही दब कर मर गए। कई बंदर बुरी तरह घायल हो गए थे, जिन्होंने बाद में दम तोड़ दिया था। जनपद में भारी संख्या में मानव और पशु क्षति भी हुई थी। बताया जाता है कि तब से बंदर इस गांव की ओर मुडकर नहीं देखते हैं। जबकि गंगोलगांव के समीप ही ग्वाड़, देवलधार और सगर गांवों में बंदर खेत-खलियान में फसलों के साथ ही घर-आंगन में बेल की सब्जियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। गंगोलगांव के प्रकाश सिंंह, राम सिंह और महेंद्र सिंह राणा का कहना है कि भूकंप से पहले गांव में बंदरों का आतंक मचा रहता था। लेकिन भूकंप के बाद से बंदर गांव में नहीं आते हैं।
उत्तराखंड के इस गांव में जाने से आज भी डरते हैं बंदर, पढ़ें क्या है रौचक रहस्य–
by laxmi Purohit | Oct 7, 2021 | चमोली, भूकंप | 0 comments

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