जिलाधिकारी गौरव कुमार को सौंपे मांगपत्र में विशेष जांच और पुनः परीक्षण की मांग उठाई, कहा, अन्य दस्तावेेजों को भी माना जाए आधार–
गोपेश्वर। उत्तराखंड राज्य आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के बावजूद चिन्हीकरण से वंचित रह गए वास्तविक एवं पात्र आंदोलनकारियों के मामलों की विशेष जांच और पुनः परीक्षण की मांग की गई है। इस संबंध में आंदोलनकारियों ने जिलाधिकारी चमोली को मांगपत्र सौंपा।
मांगपत्र में कहा गया कि राज्य निर्माण आंदोलन में हजारों माताओं, बहनों, युवाओं और बुजुर्गों ने संघर्ष किया। कई लोगों ने गिरफ्तारी, मुकदमों और पुलिस कार्रवाई का सामना किया, लेकिन विभिन्न कारणों से अनेक वास्तविक आंदोलनकारी आज भी प्रमाण-पत्र से वंचित हैं।
कहा कि चिन्हीकरण के लिए केवल सरकारी दस्तावेजों तक सीमित न रहकर समाचार-पत्रों की कटिंग, पूर्व चिन्हित आंदोलनकारियों की गवाही, फोटो, पत्र-पर्चे, गिरफ्तारी व मुकदमे के अभिलेख, जेल रिकॉर्ड और संघर्ष समितियों के दस्तावेजों को भी साक्ष्य माना जाए। पुराने प्रमाण-पत्रों में नाम, पिता के नाम या गांव संबंधी त्रुटियों को संशोधित करने की मांग भी की गई।
ज्ञापन देने वालों में जिला स्तरीय आंदोलनकारी चिन्हीकरण समिति के सदस्य पूर्व प्रमुख नंदन सिंह बिष्ट, अतुल शाह, कुलदीप वर्मा, भारत सिंह, राघवेंद्र वर्मा, मोहन सिंह नेगी, एसएल श्रीवास्तव, प्रदीप फर्स्वाण, प्रेम फर्स्वाण, देवेंद्र सिंह नेगी, हरीश पुरोहित सहित कई आंदोलनकारी शामिल रहे।

