पांच सितंबर को तीनों डोलियां कैलाश के लिए होंगी रवाना, बृहस्पतिवार से शुरू होगा तीन दिवसीय नंदा मेला
नंदानगर, 02 सितंबर 2026: मां नंदा की बड़ी जात को लेकर सिद्धपीठ कुरुड़ मंदिर सजकर तैयार हो गया है। मंदिर परिसर में रंग-रोगन का काम पूरा कर लिया गया है और चारों ओर फूलों से सजावट की जा रही है। बृहस्पतिवार से कुरुड़ में तीन दिवसीय नंदा मेले का शुभारंभ होगा। मेले का उद्घाटन नंदानगर की ब्लॉक प्रमुख हिमा देवी करेंगी। इस दौरान मां नंदा के जागरों के साथ महिला मंगल दलों और स्कूली छात्र-छात्राओं की ओर से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
कुरुड़ मंदिर समिति के अध्यक्ष सुखवीर रौतेला ने बताया कि मां नंदा की बड़ी जात की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। पांच सितंबर को अपराह्न तीन बजे मां नंदा की तीनों डोलियांकुरुड़ से कैलाश के लिए रवाना होंगी। यात्रा को लेकर नंदानगर सहित पूरे उत्तराखंड के श्रद्धालुओं में उत्साह है।

20 सितंबर को होमकुंड में होगी पूजा, चौसिंग्याखाडू की होगी विदाई
मां नंदा की बड़ी जात पांच सितंबर को कुरुड़ से रवाना होकर विभिन्न पड़ावों से होते हुए 12 सितंबर को रामणी पहुंचेगी। यहां विभिन्न देवी-देवताओं की डोलियों और छंतोलियों का मिलन होगा। इसके बाद जात आला, सितेल और कनोल होते हुए 15 सितंबर को वाण स्थित लाटू देवता मंदिर पहुंचेगी। यहां से रणकधार और गैरोली पातल होते हुए 18 सितंबर को वेदनी बुग्याल पहुंचेगी, जहां सप्तमी की पूजा होगी।
19 सितंबर को जात बगुवावासा, पातर नचौणियां, कैलवा विनायक, रूपकुंड और ज्योंरागली होते हुए शिलासमुद्र पहुंचेगी। 20 सितंबर को होमकुंड में मां नंदा की पूजा-अर्चना के बाद चौसिंग्याखाडू की विदाई होगी। इसके बाद श्रद्धालु जामुनडाली में रात्रि प्रवास करेंगे। 30 सितंबर को मां नंदा की डोली सुतोल, पैरी, सितेल, गुलाड़ी, नारंगी और फरखेतपड़ावों से होते हुए कुरुड़ मंदिर पहुंचेगी। इसके साथ ही बड़ी जात का समापन होगा।
यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर समितियों का गठन कर लिया गया है। निर्जन और दुर्गम पड़ावों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस और एसडीआरएफ संभालेगी।
नौ माह पहले मां नंदा को समर्पित किया खाडू
इस वर्ष सुंग गांव के भेड़ पालक रमेश सिंह बिष्ट का आठ माह का चौसिंग्याखाडू मां नंदा की कैलाश यात्रा का मार्गदर्शक बनेगा। घर में चार सींगों वाले मेढ़े के जन्म के बाद रमेश सिंह ने इसे करीब नौ माह पहले ही नंदा की बड़ी जात के लिए समर्पित कर दिया था। पिछले तीन माह तक खाडू चीन सीमा क्षेत्र के लपथल बुग्याल में चरान के लिए गया था और 28 अगस्त को सुंग गांव लौटाया गया। तीन सितंबर को इसे गाजे-बाजे के साथ कुरुड़ मंदिर पहुंचाया जाएगा।
ग्राम प्रधान सुंगतीरथ सिंह बिष्ट ने बताया कि वर्ष 2014 में भी सुंग गांव के केदार सिंह बिष्ट का चौसिंग्याखाडू मां नंदा की बड़ी जात में देवरथ बना था। इस बार भी खाडू को लेकर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है।

