गोपेश्वर। चमोली जनपद से लगी नीती और माणा घाटी के ग्रामीणों की शीतकालीन प्रवास स्थलों को अपने नाम दर्ज करने की मांग जोर पकड़ने लगी है। बृहस्पतिवार को दोनों घाटी के ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने जिला पंचायत सभागार में बैठक कर अपनी मांग को पुरजोर ढंग से उठाने का निर्णय लिया। उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन भेजा। ग्राम प्रधान संगठन के जिला महामंत्री व ग्राम प्रधान कागा पुष्कर सिंह राणा ने कहा कि प्रतिवर्ष नीती और माणा घाटियों में ठंड बढ़ने से ग्रामीण अपने गांवों को छोड़कर जनपद के निचले क्षेत्रों में अपने शीतकालीन प्रवास स्थलों (भोटिया पड़ाव) में पहुंच जाते हैं। लेकिन आज तक प्रवास स्थल संबंधित ग्रामीणों के नाम दर्ज नहीं हुए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि आदिकाल से ही सीमांत क्षेत्र के ग्रामीण तिब्बत व्यापार कर अपनी आजीविका का निर्वहन करते थे। सीमांत क्षेत्रों में जगह-जगह व्यापारिक केंद्रों के माध्यम से व्यापार किया जाता था। लेकिन वर्ष 1962 के बाद तिब्बत पर चीन का आधिपत्य हो जाने के कारण तिब्बत व्यापार पूर्ण रूप से बंद हो गया था। तब ग्रामीणों ने ऊनी कुटीर उद्योग, पशुपालन और खेती को ही अपनी आजीविका का मुख्य साधन बनाया और व्यापार केंद्रों में ही निवास करने लगे। लेकिन आज तक शीतकालीन प्रवास भूमि का ग्रामीणों को मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। इस मौके पर गढ़वाल विवि के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष मनोज रावत, हेमलता राणा, क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रवेंद्र सिंह, जशोदा देवी, नंदी राणा, रुक्मणी देवी, दमयंती देवी, मुकेश राणा, बचन सिंह, शंकर सिंह, लक्ष्मी, मनोज रावत, सुपिया सिंह राणा, धीरेंद्र सिंह गरोड़िया के साथ ही कई ग्रामीण मौजूद थे।
जोर पकड़ने लगी भोटिया जनजाति के ग्रामीणों की मांग, शीतकालीन प्रवास स्थलों की भूमि अपने नाम दर्ज करने की मांग उठाई–
by laxmi Purohit | Nov 11, 2021 | चमोली, समस्या | 0 comments

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