मलारी न्याय पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी को सौंपा छह सूत्री ज्ञापन, रोडवेज बस के साथ ही कई मांगें उठाई–
गोपेश्वर, 22 जुलाई 2026: सीमांत नीती घाटी की न्याय पंचायत मलारी के अंतर्गत आने वाली 11 ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों और ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों ने मंगलवार को जिलाधिकारी को छह सूत्री ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सीमांत क्षेत्र होने के बावजूद नीती घाटी के गांव आज भी कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं, जिससे ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ज्ञापन में सबसे प्रमुख मांग विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (वीबी-जीरामजी) के कार्यों को ऑफलाइन माध्यम से संचालित करने की अनुमति देने की की गई। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि घाटी में मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क की स्थिति बेहद खराब है, जिसके कारण ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करना संभव नहीं हो पाता और योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आती है।
उन्होंने राजस्व संबंधी कार्यों के सुचारु संचालन के लिए क्षेत्र के राजस्व उपनिरीक्षक की प्रत्येक माह कम से कम 15 दिन मलारी में उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भापकुंड, जेलम और बांपा का उच्चीकरण कर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई।
ज्ञापन में मलारी न्याय पंचायत के सभी गांवों तक हाई-डेंसिटी पॉलीइथिलीन(एचडीपीई) पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल व्यवस्था मजबूत करने, ज्योतिर्मठ से नीती गांव तक नियमित रोडवेज बस सेवा शुरू करने तथा कागा, गरपक, जेलम और द्रोणागिरी गांवों को भारत नेट (ब्रॉडबैंड) सेवा से जोड़ने की मांग भी प्रमुखता से रखी गई।
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि सीमांत गांवों में संचार, स्वास्थ्य, पेयजल और परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं का विस्तार राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमांत क्षेत्रों के विकास की दृष्टि से भी आवश्यक है। उन्होंने प्रशासन से सभी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए शीघ्र कार्रवाई करने की अपेक्षा जताई।
इस दौरान मलारी के ग्राम प्रधान देव सिंह राणा, द्रोणागिरी की ग्राम प्रधान माहेश्वरी देवी, ग्राम प्रधान कमला देवी, लक्ष्मी देवी, दयाल सिंह, हरेंद्र सिंह सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

